
नई दिल्ली। यूजीसी के संसदीय नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार का किसी से सलाह-मशविरा न करने का रवैया उसके हर फैसले में दिखाई देता है। सिब्बल ने चेतावनी दी कि समाज के किसी भी वर्ग को नजरअंदाज करना देश के भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सिब्बल ने एक इंटरव्यू में कहा कि यूजीसी के नए संसदीय नियमों पर मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए इस पर सीधे टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन व्यापक दृष्टिकोण से उन्होंने कहा कि भारत तभी विकसित राष्ट्र बन सकता है, जब हर वर्ग को साथ लेकर नीतियां बनाई जाएं। उन्होंने कहा कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली कोई भी कोशिश देश के हित में नहीं है।
सिब्बल ने कहा कि 2014 से जब भारत सरकार में मौजूदा नेतृत्व आया, तब से नीतियां बिना व्यापक चर्चा के बनाई जा रही हैं। उनके अनुसार, सरकार अपने विचार किसी से साझा नहीं करती और यही प्रवृत्ति हर बड़े फैसले में नजर आती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में सभी समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
शीर्ष अदालत ने हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के 2026 के संसदीय रेगुलेशंस पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि नियम पहली नजर में अस्पष्ट हैं, इनके परिणाम बहुत व्यापक हो सकते हैं और समाज पर खतरनाक असर डाल सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब मांगा है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सीमित कर दी गई है।
आरटीआई पर कही ये बात
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