
इंदौर। अभी पिछली कैबिनेट बैठक में 21 किलोमीटर लम्बे और आठ लेन चौड़े इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को ना सिर्फ मंजूरी मिली, बल्कि अब उससे जुड़े विकास कार्यों के लिए एमपीआईडीसी ने लगभग 268 करोड़ रुपए के टेंडर जारी कर दिए हैं, जिनमें रोड, ड्रैनेज, बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी। साथ ही आठ लेन कॉरिडोर का कॉरिडोर भी निर्मित होगा, जिस पर कुल 2360 करोड़ रुपए खर्च किए जाना है। 3200 एकड़ जमीन इसमें शामिल की गई है और 60 फीसदी विकसित जमीन किसानों को वापस दी जाएगी, ताकि उस पर वे अपना खुद का उद्योग भी लगा सकेंगे या उसे किसी अन्य उद्यमी को बेच सकेंगे।
यह परियोजना देश में अपनी तरह की पहली ऐसी योजना है, जहां किसानों की सहमति से बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। कॉरिडोर के दोनों तरफ 3 से 5 किलोमीटर तक औद्योगिक जोन बनेगा। कुल 1290.74 हेक्टेयर (लगभग 3200 एकड़) भूमि का विकास प्रस्तावित है, जिसमें से 60 प्रतिशत विकसित भूमि किसानों को वापस मिलेगी। किसान अपनी जमीन पर खुद उद्योग लगा सकेंगे या उसे अन्य उद्योगपतियों को बेच सकेंगे। यह लैंड पूलिंग एक्ट के तहत लागू नई नीति है, जहां सामान्यत: 50 प्रतिशत भूमि लौटाई जाती है, लेकिन यहां मुख्यमंत्री के निर्देश पर 60 प्रतिशत देने का प्रावधान किया गया है।
जो किसान नकद मुआवजा चाहें, वे राज्य की भूमि क्रय नीति के अनुसार भुगतान ले सकेंगे। परियोजना से जुड़े 17 गांवों कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ के किसानों को सीधा लाभ होगा। इन गांवों के ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हाउसिंग और कमर्शियल डेवलपमेंट का भी प्लान केवल उद्योग ही नहीं, इस कॉरिडोर में हाउसिंग स्कीम भी लागू होगी। उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए कॉलोनाइजर आवास उपलब्ध कराएंगे। किसान और बिल्डर मिलकर कॉलोनियां विकसित कर सकेंगे, जिसमें दुकानें, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ऑफिस एरिया भी शामिल होंगे। इससे क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगी। चुनौतियां और प्रगति परियोजना के शुरुआती चरण में कई किसानों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। स्थानीय सुनवाई के बाद करीब 450 से अधिक अपीलें भोपाल के अपीलीय प्राधिकारी के पास लंबित हैं, जिनकी सुनवाई जारी है।
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