तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान (iran) ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के कम से कम सात सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में अमेरिकी सैन्य संचार और रडार सिस्टम (US military communications) को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वीकेंड और सोमवार के दौरान किए गए हमले बहरीन, क़तर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास हुए।
The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों का मुख्य लक्ष्य सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल, रडार डोम और ऐसे उपकरण थे जिन्हें खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना के कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है।
सबसे बड़े हमलों में से एक कतर में स्थित Al Udeid Air Base पर हुआ, जो इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है।
इसके अलावा ईरानी ड्रोन हमलों में रियाद और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों के आसपास के क्षेत्रों के साथ सऊदी अरब और कतर के तेल-गैस ढांचे को भी निशाना बनाने की खबरें सामने आई हैं।
विश्लेषण में यह सवाल भी उठाया गया है कि ईरान इतनी सटीकता से अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी कैसे जुटा सका। The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध के शुरुआती हफ्तों में अमेरिकी सेना को ट्रैक करने की ईरान की क्षमता कमजोर पड़ गई थी। ऐसे में रूस से मिलने वाली जानकारी तेहरान के लिए काफी अहम साबित हुई।
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक रूस यह अच्छी तरह जानता है कि अमेरिका यूक्रेन को कितनी सैन्य सहायता दे रहा है। ऐसे में ईरान की मदद कर मॉस्को अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि चीन और ईरान के करीबी संबंधों के बावजूद फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि बीजिंग इस संघर्ष में तेहरान को सैन्य मदद दे रहा हो। विश्लेषकों के मुताबिक ईरान का रक्षा सहयोग रूस के साथ कहीं अधिक मजबूत है।
2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू होने के बाद से ईरान मॉस्को के प्रमुख सहयोगियों में शामिल हो गया है। बताया जाता है कि ईरान ने रूस को तकनीक और सस्ते स्ट्राइक ड्रोन उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के कई शहरों पर हमलों में हुआ।
अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाइयों के बावजूद ईरान ने पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। वह लगातार सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिए हैं कि इस संघर्ष की अवधि तय नहीं है और दोनों पक्षों को लगता है कि अंततः विरोधी पहले झुकेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि रूस की खुफिया मदद इसी तरह जारी रही, तो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमले आने वाले समय में और तेज हो सकते हैं।
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