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किसान आंदोलन: गाजीपुर बॉर्डर से उखड़ने लगे तंबू, उठने लगे लंगर, 11 को लौटने की हो रही तैयारी, देखें तस्वीरें

गाजियाबाद। तीनों कृषि कानून वापस लेने और किसानों की मांगों को मानने का लिखित प्रस्ताव केंद्र सरकार से मिलने के बाद गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन स्थगित करने और दिल्ली के बॉर्डरों को खाली करने का एलान कर दिया था। इसी के तहत अब किसान गाजियाबाद स्थित यूपी गेट किसान आंदोलन स्थल पर टेंट और लंगर हटाने में जुट गए हैं।

अभी किसान सिर्फ अपना सामान पैक कर वाहनों में इकट्ठा कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन का कहना है कि शनिवार को आंदोलन स्थल पर मंच का संचालन होगा। इसके बाद किसान मुख्य टेंट हटाने शुरू करेंगे। हालांकि इस प्रक्रिया में भी करीब एक हफ्ते का समय लग जाएगा।

भाकियू के जिलाध्यक्ष चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को सामान समेटने में दो से तीन दिन लग जाएंगे। 11 दिसंबर को कुछ लोग वापसी करेंगे और फिर सब सुविधाजनक तरीके से लौटते रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की वापसी खुशी और गम के बीच हो रही है। किसानों को जीत मिली है लेकिन लौटते हुए इसका कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा। बुधवार को हादसे में देश ने सीडीएस बिपिन रावत के रूप में अपना वीर सपूत खोया है और पूरा देश अभी शोक में डूबा हुआ है, किसान भी इस दुख में शामिल है। ऐसे में हम लोग शांतिपूर्ण वापसी करेंगे।

जीत तय थी
हमारी जीत पहले दिन से ही तय थी, बस सरकार को समझने में वक्त लगा। हमें खुशी है कि देर से ही सही सरकार और आम जनता सबको समझ आ गया कि यह आंदोलन प्रायोजित नहीं था बल्कि यहां किसान बैठे थे। अब मांगे मान ली गई हैं तो हम 11 दिसंबर से घर वापस लौटेंगे। – गौरव टिकैत, भाकियू युवा का राष्ट्रीय अध्यक्ष

देश की जनता ने सब देखा, वही सवाल करे
घर वापसी हो रही है इसकी खुशी है, लेकिन गम इस बात का है कि अपने जीवन में ऐसी सरकार नहीं देखी जिसने अन्नदाताओं को साल भर से अधिक सड़क पर बैठा दिया। हम भी पिछले 35 वर्षों से किसानों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। दस से पंद्रह दिन लगते थे किसी भी सरकार ने इतना लंबा नहीं बैठाया। देश की जनता ने यह सब देखा है, वही अब सवाल करेगी। – चौधरी बिजेंद्र सिंह, भाकियू गाजियाबाद जिलाध्यक्ष

यादों का पिटारा लेकर जा रहे
जब आंदोलन शुरू हुआ था हमने यह नहीं सोचा था कि इतना लंबा समय बैठना पड़ेगा, लेकिन सच की लड़ाई में किसान एकजुट रहे और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। आंदोलन से यादों का पिटारा लेकर जा रहे हैं। अब लौटते हुए एक कसक है, यहां से अलग होने का न केवल प्रदेश बल्कि देश भर से आए भाइयों से दोस्ती हुई, अब सब बिछड़ेंगे, इस इसी बात की तकलीफ है। – रामपाल सिंह, अमरोहा जिला अध्यक्ष

आंदोलन का तैयार करेंगे पूरा एल्बम
आंदोलन में बिताए गए पलो को जो मोबाइल में कैद है, तारीखों के साथ उसका एक एलबम तैयार करेंगे। अपने इस एलबम को गांव की लाइब्रेरी में रखवाएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियां एकता के ताकत को समझ सके और हमेशा एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें। हमें खुशी है कि हमारी बातें मान ली गई, लेकिन गम इस बात का है कि सरकार ने हमारी बात समझने में बहुत देर कर दी जिससे पूरा देश परेशान रहा। – संजय, मेरठ

जीत की खुशी और यारों से बिछड़ने का गम
किसानों की जीत हुई, देश ने ही नहीं पूरे विश्व ने इसे देखा। जो लोग किसानों को दोष देते थे, आज वह भी समझ गए होंगे हम गलत नहीं हैं। जीत की खुशी है लेकिन अब घर वापसी के एलान से दोस्तों से बिछड़ने का गम हो रहा है। – जिले सिंह, सहारनपुर

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