
जबलपुर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को एसडीएम अधारताल की उपस्थिति में गयासुदद्दीन नामक युवक की लाश एक साल बाद कब्र से निकाली गई। मंडी मदार टेकरी स्थित कब्रिस्तान में दफ्न शव को निकालने के बाद पोस्टमार्टम के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मामले में मृतक के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी ने गयासुद्दीन की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। जांच के लिए जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डिवीजन बेंच ने सख्त आदेश के बाद आज दोपहर 1 बजे तक शव कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सच्चाई सामने लाने के लिए यह जरूरी है और किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने जबलपुर प्रशासन को निर्देश दिए थे कि शव निकालने के बाद उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज भेजा जाए और पूरे मामले की प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में पूरी की जाए। साथ ही मृतक के परिवार पत्नी, पुत्र और भाई को सुबह 11 बजे एसडीएम अधारताल के सामने उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि अपीलकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी तय समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मामले में राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह ने कहा कि अपीलकर्ता खुद सहयोग नहीं कर रहा। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए पोस्टमार्टम की मांग की। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त व अधिवक्ता मयंक शर्मा हाजिर हुए।
सड़क हादसे में हुई थी मौत
गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क हादसे में घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें पहले जबलपुर, फिर नागपुर ले जाया गया। 27 मार्च 2025 को नागपुर में उनकी मौत हो गई। शव को बिना विस्तृत जांच के दफना दिया गया। मृतक के भाई का आरोप था कि डिस्चार्ज रिपोर्ट में उसके सीने पर चोट के निशान पाए गए थे, जिससे कि उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में होना माना जा रहा है। उनका कहना है कि जबलपुर पुलिस को शिकायत देने के बावजूद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। नरसिंहपुर जिले के बहोरीपार गांव में उनका पैतृक निवास है। यहीं उनका एक्सीडेंट हुआ था।
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