
दिन में हाईकोर्ट की फटकार के बाद रात में आयुक्त के साथ ठेकेदार की चर्चा, अब एलिवेटेड कॉरिडोर सहित तुड़ाई को लेकर फैसला संभव
इंदौर। निगम के कर्णधारों ने बीआरटीएस (BRTS) तुड़ाई को मजाक बनाकर रख दिया। यहां तक कि हाईकोर्ट (High Court) को लगातार फटकार लगाना पड़ रही है। कल भी हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि जनता यूं ही परेशान होती रहेगी। ना तो बीआरटीएस टूटेगा और ना एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा। हालांकि हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को फिर सुनवाई का निर्णय लिया है और ठेकेदार को भी फटकार लगाई। मगर दूसरी तरफ रात को जब ठेकेदार को आयुक्त ने बुलाया तो उसने दो टूक मना कर दिया कि वह बीआरटीएस नहीं तोड़ सकता। जो रैलिंग निकालकर बेची उसका भुगतान वह निगम को कर देगा।
अभी हाईकोर्ट द्वारा लगातार इंदौर से जुड़े कई मामलों की सुनवाई की जा रही है, जिसमें भागीरथपुरा कांड भी शामिल है और बीआरटीएस तो चल ही रहा है। 11 माह बाद भी निगम बीआरटीएस को नहीं हटा पाया है। सिर्फ एक तरफ की रैलिंग ही हाईकोर्ट निर्देश पर हट सकी। कल ठेकेदार दिनेश यादव को भी हाईकोर्ट ने तलब किया। मगर कोर्ट में भी उसने यही बोला कि मैं काम नहीं कर सकता, क्योंकि यह घाटे वाला काम है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जनता को परेशान नहीं कर सकते, ठेका लेने के पहले क्यों नहीं सोचा। कोर्ट ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को भी निर्देश दिए कि वह ठेकेदार से चर्चा करे और साथ ही मुख्य सचिव को भी निर्देश दिए कि वे लोक निर्माण विभाग और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर एलिवेटेड कॉरिडोर पर निर्णय लें। हाईकोर्ट निर्देश के बाद कल रात आयुक्त ने ठेकेदार को बुलाया। मगर सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार ने स्पष्ट कह दिया कि वह काम नहीं कर सकता और जो रैलिंग निकाली और बेची, जो संभवत: 30-40 लाख रुपए की है, उसका भुगतान वह निगम को कर देगा। हालांकि आयुक्त सिंघल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी चर्चा जारी है और 28 जनवरी को हाईकोर्ट को वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा। इधर, निगम सूत्रों का यह भी कहना है कि अब अगली सुनवाई में हाईकोर्ट ही इस बारे में फैसला कर सकता है कि वही ठेकेदार बीआरटीएस तोड़ेगा या नगर निगम खुद अथवा किसी अन्य ठेकेदार से यह कार्य करवाए और तब तक एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर भी वस्तु स्थिति सामने आ जाएगी। हालांकि पीडब्ल्यूडी का कहना है कि वह ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर रहा है, क्योंकि पुरानी प्लानिंग बीआरटीएस के रहते हुए की गई थी और अब चूंकि बीआरटीएस हट गया है तो प्लानिंग में संशोधन करना पड़ेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved