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MP विधानसभा में उठा MBBS छात्रा रोशनी की मौत का मामला, की गई ये बड़ी मांग

February 23, 2026

भोपाल। भोपाल (Bhopal) के गांधी मेडिकल कॉलेज (Gandhi Medical College) की एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी की मौत का मामला विधानसभा में उठा। विधानसभा सत्र के दौरान विधायक सेना महेश पटेल ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। वहीं मंत्री नरेद्र शिवाजी पटेल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम के समय रोशनी की मां मौजूद थीं। इस घटना की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि SIT में तीनों अधिकारी महिलाएं हैं।

विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि इस घटना की सूचना समय पर रोशनी के परिजनों को दी गई थी। वहीं विधायक पटेल ने हत्या का संदेह होने की बात सदन में कही। उनका आरोप है कि पुलिस उचित जांच नहीं कर रही है। इस पर जवाब देते हुए मंत्री नरेद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि रोशनी प्राइवेट होस्टल में रह रही थी। गांधी मेडकिल कॉलेज में पांच डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया है। मृतका के सिर पर कोई चोट नहीं पाई गई है। मृतका के फोन की जांच भी की गई है।


  • रोशनी ने स्वयं वाट्सअप ग्रुप में लिखा है कि डॉक्टरी की पढ़ाई समझ नहीं आ रही है। रोशनी कैमरे में तीसरी मंजिल पर जाते हुए दिखाई दी है। उसके पास एसिड की बोतल मिली है। अभी तक हत्या के साक्ष्य नहीं पाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस ने सूचना मिलते ही जांच शुरू कर दी थी। इस घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया गया है। रोशनी का शव जिस कमरे में मिला था उसका दरवाजा अंदर से बंद था।

    बच्चों की काउंसलिंग क्यों नही करवाई जा रही
    विधायक राजन मंडलोई ने छात्रा की मौत पर कहा कि पहले भी मेडिकल कॉलेज में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। नए बच्चों की काउंसलिंग क्यों नही करवाई जा रही है। इस घटना को पुलिस ने शुरू से ही आत्महत्या मान लिया है। इस पूरी घटना की जांच जातिगत भेदभाव के नजरिए से भी नहीं हुई है। इस पर मंत्री नरेद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि वे भी गांव से निकलकर इंजीनियरिंग कॉलेज गए थे। वहां बहुत चुनोतियों का सामना किया था। वे भी ओबीसी वर्ग से आते हैं। उनके सभी का स्नेह मिला। इस घटना में प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    सिंघार ने भी उठाए सवाल
    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि रोशनी एक आदिवासी परिवार की थी। पढ़ने में बच्ची मेघावी थी तो आत्महत्या कैसे कर सकती है। उसके शरीर पर निशान हैं। क्या बच्ची ने खुद ही गला दबाया है?

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