
इंदौर। राजस्व मामलों में आमतौर पर महीनों तक लंबित रहने वाले प्रकरणों को लेकर इस बार प्रशासनिक सख्ती का असर साफ दिखाई दिया। 13 से 31 मार्च तक चलाए गए विशेष अभियान में अधिकारियों ने वह काम निपटा दिया, जो सामान्य स्थिति में सालभर तक अटका रहता है। अभियान के दौरान 1139 सीमांकन, 502 बंटवारा, 1194 बंटांकन और 4607 नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें 564 विवादित नामांतरण भी शामिल हैं, जो लंबे समय से लंबित थे। इसके अलावा 947 ऐसे प्रकरण, जो अभिलेख दुरुस्ती के अभाव में महीनों से फंसे हुए थे, उन्हें भी तेजी से निपटाया गया। हालांकि, अभी भी 558 दुरुस्ती से जुड़े प्रकरण विभिन्न तहसीलों में लंबित बने हुए हैं, जिन पर काम जारी है।
पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर चलाए गए राजस्व के महाअभियान ने पिछली जुलाई तक के सभी प्रकरणों को लगभग खत्म कर दिया था, लेकिन उसके बाद उनके तबादले से फिर वही स्थिति निर्मित होने लगी थी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस नीति को अपनाते हुए महाअभियान शुरू करवाया, जिसके नतीजे चौंका देने वाले सामने आए। यदि 28 फरवरी तक दर्ज व 31 मार्च तक निराकृत मामलों की स्थिति पर नजर डालें, तो सीमांकन के 1419, रास्ता विवाद के 227, बंटवारे के 584, बंटांकन के 1591, नामांतरण के 5869 और विवादित नामांतरण के 721 प्रकरण लंबित थे। इसके अलावा कब्जे से जुड़े 313 और अभिलेख दुरुस्ती के 1537 मामले भी फाइलों में दबे हुए थे। इन सभी प्रकरणों की गति बेहद धीमी थी और आवेदकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा था।
5 हजार का दंड
स्थिति तब बदली, जब 13 मार्च से कलेक्टर शिवम वर्मा ने राजस्व महाअभियान की शुरुआत की। अभियान के तहत प्रत्येक अधिकारी को दैनिक लक्ष्य दिए गए और कार्य में लापरवाही पर 5 हजार रुपए तक के दंड का प्रावधान किया गया। इस सख्ती के बाद ही फाइलों की रफ्तार बढ़ी और लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आई। यह आकड़े इस बात का स्पष्ट उदाहरण बनकर सामने आए है कि प्रशासनिक दबाव और तय समयसीमा के बिना काम की गति धीमी ही रहती है, वहीं जब लक्ष्य तय कर निगरानी बढ़ाई जाती है, तो परिणाम भी तेजी से सामने आते हैं, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलता है।
अब तहसीलों के बीच होगा मुकाबला
अभियान के बाद अब प्रशासन ने काम की गति बनाए रखने के लिए नया तरीका अपनाया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने तहसीलों के बीच प्रतिस्पर्धा कराने की घोषणा की है। इसके तहत प्रत्येक तहसील को उसके कार्य के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी। इसके लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया गया है, जहां तहसीलदारों को रोजाना अपने कार्यों का डेटा दर्ज करना होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अधिकारियों में बेहतर प्रदर्शन की होड़ भी देखने को मिलेगी।
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