
इंदौर, प्रियंका जैन देशपाण्डे। बाहर से चमकता, आधुनिकता में दौड़ता, स्वच्छता में नंबर वन इंदौर, लेकिन घरों के अंदर एक ऐसा घिनौना सच छिपा है, जो न सिर्फ दर्दनाक है, बल्कि पूरे समाज के चेहरे से नकाब खींच देता है। महिला बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर (सखी) के आंकड़े बताते हैं कि 5266 महिलाएं अपनों की ही यातनाओं का दर्द लेकर मदद के लिए पहुंचीं, जिनमें से 5078 मामले घरेलू हिंसा के हैं, जो आर्थिक-शारीरिक-मानसिक तरह से की जा रही थी।
देश के सबसे स्वच्छ शहर का ताज लगातार अपने नाम करने वाला, शिक्षा और चिकित्सा का उभरता हब, औद्योगिक विकास में तेजी से आगे बढ़ता और मेट्रो सिटी का रूप लेता इंदौर, लेकिन इन तमाम उपलब्धियों के बीच महिलाओं पर घरेलू हिंसा के मामलों ने शहर की संवेदनशीलता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर (सखी) द्वारा जारी ताजा आंकड़े बताते हैं कि इंदौर में घरेलू हिंसा लगातार बढ़ रही है और इसका ग्राफ चिंताजनक रूप से तेज हुआ है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कुल 5266 महिलाएं मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं, जिनमें से 5078 मामले केवल घरेलू हिंसा के रहे, जबकि 188 मामले अन्य श्रेणियों में दर्ज हुए। यानी हर 10 में से 9 महिलाएं घर के भीतर से प्रताडऩा झेलने के बाद सहायता के लिए बाहर आईं।
समझौते से भी निराकरण नहीं होता कई मामलों में
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई महीनों में यह संख्या 450 से 550 के बीच रही, जो बताती है कि समस्या न केवल बनी हुई है, बल्कि लगातार बढ़ रही है। महीने-दर-महीने बढ़ती पीड़ा न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलती है, बल्कि इस दावे को भी झूठा साबित करती है कि इंदौर शहर में महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित हैं। कई मामलों में प्रशासन और पुलिस के डर से परिवार समझौते कर मामला शांत करा देता है, लेकिन फिर वही प्रताडऩा के मामले कलेक्टोरेट की जनसुनवाई में पहुंचते हैं।
पीडि़त महिलाओं में शिक्षित और नौकरीपेशा से लेकर बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल
अप्रैल 2025 में 432 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हुईं। जुलाई में 440, अक्टूबर में 394, नवंबर में यह संख्या बढक़र 522 पहुंची और दिसंबर 2025 में 457 मामले दर्ज हुए। नवंबर माह का आंकड़ा सर्वाधिक दर्ज हुआ, जो बताता है कि शहर में कहीं न कहीं घरेलू तनाव, आर्थिक दबाव, नशा, मानसिक तनाव या पारिवारिक असंतुलन जैसे कारण तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर बड़ी-बड़ी उपलब्धियां पा रहा है, लेकिन महिलाएं अब भी असुरक्षित हैं। एक ओर इंदौर स्मार्ट सिटी, मेट्रो प्रोजेक्ट, बड़े अस्पताल, आईटी सेक्टर और शिक्षा के नए आयामों में लगातार प्रगति कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू हिंसा की स्थिति दर्शाती है कि महिलाओं की सुरक्षा और मानसिक सम्मान के मोर्चे पर शहर पिछड़ रहा है। वन स्टॉप सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार पीडि़त महिलाओं में शिक्षित, नौकरीपेशा महिलाएं, गृहिणियां, नवविवाहिताएं और यहां तक कि बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं। इससे साफ होता है कि घरेलू हिंसा किसी एक वर्ग या आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज में जड़ें जमाए हुए है। जब ज्यादातर मामलों में महिलाएं बताती हैं कि परिवार वालों ने साथ नहीं दिया, तब पड़ोसी और समाज ये घर का मामला है कहकर चुप हो जाते हैं। और जब पीडि़त महिला वर्षों बाद जाकर आवाज उठा पाती है तो उसे घर तोडऩे वाली कहा जाता है।
प्रताडऩा की माह वार स्थितिमहीना घरेलू हिंसा के मामले
अप्रैल 2025 432
मई 2025 399
जून 2025 398
जुलाई 2025 440
अगस्त 2025 457
सितंबर 2025 407
अक्टूबर 2025 394
नवंबर 2025 522 (सर्वाधिक)
दिसंबर 2025 457
जनवरी 2026 465
फरवरी 2026 342
मार्च 2026 365
कुल- 5078 घरेलू हिंसा के मामले, 188 अन्य मामले।
यह तो वह स्थिति है, जिसमें पीडि़त महिलाओं ने प्रशासन के पास जाने की हिम्मत दिखाई, इससे कई गुना ऐसे मामले होंगे, जिनमें महिलाएं पीडि़त होने के बावजूद मान-मर्यादा के डर से शिकायत करने नहीं पहुंचती हैं और घुटती रहती हैं।
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