
इंदौर (Indore)। स्वच्छ जल अभियान और जल सुनवाई के दावों के बीच जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। पानी की समस्या को लेकर बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान न होने से नागरिकों में नाराजगी है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य शासन के निर्देश पर इंदौर जिले में स्वच्छ जल अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसके तहत आज से जल सुनवाई होगी। निगम के 85 वार्डों में आज जल समस्या को लेकर सुनवाई आयोजित की गई है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली से नाराज नागरिकों ने खुलकर निगम कर्मचारियों के काम पर अविश्वास जताया है। लोगों का कहना है कि हमेशा निगम में केवल सुनवाई के नाम पर दिखावा किया जाता है, जबकि वास्तविक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र की निवासी गायत्री हार्डिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम की लापरवाही के कारण उन्हें मल-मूत्र मिला दूषित पानी पीना पड़ा। उन्होंने कहा, इन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों की गलतियों के कारण हमारी सेहत खराब हुई। हालात ऐसे बने कि दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए।
अब नगर निगम के कर्मचारियों पर हमें बिलकुल भरोसा नहीं है। वहीं कमलेश बौरासी ने बताया कि हालात अब भी बेहद खराब हैं। घर के बाहर लगी छोटी टंकियों में आज भी गंदगी भरी पड़ी है। बीमारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग पानी की आस में अपने घरों के बाहर की टंकियां साफ कर रहे हैं और बड़ी टंकियों में कमर-कमर तक गाद जमा है। जब साफ-सफाई ही नहीं कराई जा रही तो हमारा संकट कैसे दूर होगा? उन्होंने कहा कि कागजों में सफाई दिखाई जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा। दावा किया जा रहा है कि इन कार्यक्रमों में पेयजल से जुड़ी शिकायतों को सुनकर मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। हालांकि पूर्व अनुभवों को देखते हुए नागरिकों का कहना है कि पहले भी कई बार ऐसी सुनवाई हुई, लेकिन अधिकांश शिकायतें कागजों में ही सीमित रह गईं।
किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जल संबंधी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। नगर निगम आयुक्त ने बताया कि अभियान के तहत शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के साथ-साथ पानी की सभी टंकियों की अनिवार्य रूप से साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके अलावा सभी जल स्रोतों से पानी के नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा और क्लोरिनाइजेशन की कार्रवाई भी की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि जनसमस्याओं की वास्तविक जानकारी मिल सके।
अधिकारियों को अपने क्षेत्र में नजर रखने के निर्देश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में जल समस्या का समाधान करना है तो नगर निगम के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे मौके पर बैठाया जाए। नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम केवल खानापूर्ति करेगा और फोटो खिंचवाकर अभियान को सफल बताने की कोशिश करेगा। लोगों ने मांग की है कि जल सुनवाई में केवल नगर निगम कर्मचारियों को नहीं, बल्कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया जाए, ताकि समस्याओं का वास्तविक और स्थायी समाधान हो सके। वहीं कलेक्टर ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण करने, लोगों से सीधे संवाद करने और शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज कर मौके पर समाधान करने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि इस बार अभियान केवल औपचारिक न रहकर परिणामकारी होगा, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved