वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) की गतिविधियों ने वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती आंदोलन (Houthi movement) ने हाल में मिसाइल हमले तेज करते हुए क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बनाने के संकेत दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
हूतियों की पकड़ बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास मजबूत मानी जाती है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और एशिया-यूरोप के बीच लगभग 10–12% वैश्विक समुद्री व्यापार यहीं से गुजरता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह मार्ग बाधित होता है तो ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
हूतियों को ईरान समर्थित “प्रतिरोध अक्ष” का हिस्सा माना जाता है, जिसमें हिज्बुल्लाह जैसे समूह शामिल हैं। हालिया हमलों को इस नेटवर्क की संयुक्त रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हमले जारी रहे तो वे समुद्री मार्गों को भी निशाना बना सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाब-अल-मंडेब मार्ग बाधित हुआ तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल संभव है। इससे पहले ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कीमतें और बढ़ सकती हैं। एशियाई देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि वे बड़ी मात्रा में मध्य पूर्व से तेल आयात करते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब भी असुरक्षित हुआ, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दोहरा दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
इस बीच कई देशों ने संघर्ष को लेकर चिंता जताई है और तनाव कम करने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है, क्योंकि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
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