
उज्जैन। शहर में गर्मी और मावठे की बारिश के कारण बिलों से सांप निकालने की घटनाएं बढ़ रही है। ऐसे में सांप रेस्क्यू के लिए वन विभाग निजी स्नेक कैचरों के भरोसे ही है, क्योंकि उज्जैन में वन विभाग के पास खुद का एक भी सांप विशेषज्ञ नहीं है।
उल्लेखनीय हैं कि उज्जैन में वन विभाग की रेस्क्यू टीम जंगली जानवरों को पकड़ लेती हैं, लेकिन उनके लिए सांप को पकडऩा मुश्किल हैं। वर्तमान में विभागीय व्यवस्था में वन विभाग के नियमित कर्मचारी जंगली जानवर जैसे नील गाय, सियार, लोमड़ी, बंदर आदि जंगली जानवरों को पकडऩे में तो सक्षम हैं लेकिन अगर साँप निकलने की बात आती है तो वह सिर्फ असहाय ही नजर आते हैं। साँप निकलने की सूचना पर कोई स्नेक कैचर की व्यवस्था यहाँ नहीं है। यही कारण है कि वन विभाग निजी स्नेक एक्सपर्ट को बुलाकर साँप को पकड़वाते हैं। ऐसे में विभाग को यह जानकारी भी नहीं लग पाती है कि शहर के रहवासी इलाके में जो साँप निकलते है वह कौन सी प्रजाति के है। हालांकि उज्जैन वन विभाग के रेस्क्यू टीम में दो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ऐसे हैं जो साँप पकडऩे की कला को जानते हैं। अधिकतर निजी स्नेक कैचर के अनुपस्थिति में विभाग इनके सहयोग से ही साँप पकड़ कर जंगल में छोड़ता है।
इन नंबरों पर करे कॉल
वन विभाग द्वारा हर साल सांप पकडऩे के लिए निजी स्नेक कैचर और इनकी टीम की मदद ली जाती हैं। वे साँपों को पकड़ कर जंगल में छोड़ आते हैं। इस बार भी वन विभाग द्वारा कई निजी स्नेक एक्सर्ट के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। शहर तथा गांव में सांप दिखने पर इन नंबरों पर (9754797230, 7828705050, 9179777242, 8085050001, 9826442620) सूचना देकर मदद माँगी जा सकती है। वहीं साँप पकड़वाने का खर्चा भी लोगों को खुद उठाना पड़ेगा। गर्मी के दौरान उज्जैन जिले में खासकर रसेल वाइपर, कोबरा और घोड़ा पछाड़ साँप ज्यादा निकलते हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved