
इन्दौर। नगर निगम द्वारा कल समाप्त हुए वित्त वर्ष में कुल 6.12 अरब रुपए संपत्ति कर के रूप में वसूल किए गए हैं। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 1.83 अरब रुपए ज्यादा है। नगर निगम द्वारा संपत्ति कर की वसूली को पूरे वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि इस वित्त वर्ष में नगर निगम 6.12 अरब रुपए का संपत्ति कर वसूल करने में सफल रहा है। पिछले वित्त वर्ष में नगर निगम ने 4.29 अरब रुपए का संपत्ति कर वसूल किया था। इस तरह से इस वित्त वर्ष में निगम 1.83 अरब रुपए का ज्यादा संपत्ति कर वसूल कर सका है।
जोन स्तर पर वसूली की स्थिति
नगर निगम के जोनल कार्यालय के स्तर पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा राजस्व का संग्रहण जोनल कार्यालय क्रमांक 22 में हुआ है। वहां पर 79 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रहित किया गया, जबकि दूसरे नंबर पर जोनल कार्यालय क्रमांक 13 हो रहा है, जहां से 67 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रहित हुआ है। इसके अलावा जोनल कार्यालय क्रमांक 19 में 52 करोड़, 17 में 49 करोड़ और 21 में 43 करोड़ का राजस्व संग्रहित हुआ है। राजस्व संग्रहण में सबसे ज्यादा वृद्धि जोनल कार्यालय क्रमांक 17 में हुई है। पिछले वित्त वर्ष में वहां पर 23.39 करोड़ का राजस्व संग्रहित हुआ था। इसमें इस बार 212 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
जल कर की वसूली घटी
पिछले पूरे वित्त वर्ष में जल कर की वसूली घट गई है। कल समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान जल कर के रूप में नगर निगम को 40 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है, जबकि इसके पूर्व के वित्त वर्ष में जल कर के रूप में 1.25 अरब रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। इस तरह से जल कर की वसूली 85.35 करोड़ रुपए कम हो गई है। जल कर के साथ ही ब्लक वाटर टैक्स भी काम हो गया है। इस टैक्स के रूप में पिछले वर्ष में 14.54 करोड़ रुपए की राशि आई है, जबकि उसके पहले के साल में 32.63 करोड़ रुपए आए थे। इसी तरह से घर-घर से कचरा संग्रहण का निगम द्वारा लिया जाने वाला शुल्क भी काम हो गया है। पिछले वित्त वर्ष में यह शुल्क 17.17 करोड़ रुपए आया है, जबकि उसका पहले के वित्त वर्ष में 29.46 करोड़ रुपए आए थे। ब्लक कचरा संग्रहण के शुल्क में जरूर वृद्धि हुई है। हाल में समाप्त हुए वर्ष में यह शुल्क 8.17 करोड़ रुपए वसूल किया गया है। इसके पहले के साल में यह वसूली 7.81 करोड़ रुपए थी।
वाहनों की बिक्री से निगम की चांदी
शहर में नागरिकों द्वारा जब भी कोई नई गाड़ी खरीदी जाती है तो उस गाड़ी के विक्रय के साथ में निगम को पार्किंग शुल्क भी मिल जाता है। इस शुल्क से निगम को 15 करोड रुपए की कमाई हुई है, जबकि इसके पिछले साल में यह कमाई 14.61 करोड़ की थी। निगम के मार्केट डिपार्टमेंट को इस साल में 15.24 करोड़ की कमाई हुई है, जबकि पिछले साल यह कमाई 14.49 करोड़ की थी। अलबत्ता निगम को लाइसेंस शुल्क से होने वाली कमाई जरूर घट गई है। इस शुल्क से पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 3.21 करोड़ रुपए हासिल किए हैं, जबकि उसके पिछले तो वर्ष में 4.48 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे।
कॉलोनी के विकास से भी निगम की कमाई बढ़ी
पिछले वित्त वर्ष के दौरान नगर निगम के कॉलोनी सेल को विभिन्न कॉलोनी को दी गई विकास की अनुमति और अन्य कार्यों से 178 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। जबकि इसके पिछले साल में यह कमाई 168 करोड़ की थी। शहर में विभिन्न निर्माण कार्य के लिए नगर निगम द्वारा दी गई भवन अनुज्ञा से इस वर्ष में 161 करोड रुपए की कमाई हुई है, जबकि इसके पिछले साल में यह कमाई 82.69 करोड़ की थी। भावनाओं के अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग से निगम ने इस वित्त वर्ष में 3.21 करोड़ रुपए अर्जित किए हैं। इसके पिछले वित वर्ष में यह काम ए 8.15 करोड़ की थी।
कल करीब 34 करोड़ जमा हुए निगम खजाने में
कल 31 मार्च के चलते नगर निगम के सभी झोनलों से लेकर मुख्यालय पर टैक्स जमा करने वालों की खासी भीड़ जमा रही और रात 12 बजे तक कई झोनों पर टैक्स जमा होता रहा। कल दिनभर में करीब 34 करोड़ के आसपास की राशि निगम खजाने में जमा हुई है।
नगर निगम ने इस बार सम्पत्ति कर, जल कर और कचरा प्रबंधन शुल्क की वसूली के लिए झोनलों पर टीमों को अलर्ट किया था और सबको अलगग-अलग टारगेट दिए गए थे, ताकि राशि वसूली की जा सके। बड़़े झोनों में कई अतिरिक्त कर्मचारियों की भी तैनात की गई थी, ताकि राजस्व वसूली का कार्य पूरा हो सके। बड़े बकायादारों की संपत्ति कुर्की से लेकर जब्ती के अभियान चलाए गए, जिसके चलते इस बार निगम को खासा राजस्व मिला। नगर निगम के अपर आयुक्त शृंगार श्रीवास्तव के मुताबिक कल दिनभर में सभी झोनों से लेकर मुख्यालय के कैश काउंटरों पर लोगों की भीड़ रही और सरचार्ज से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने राशि जमा कराई। रात 12 बजे तक कई झोनों पर राशि जमा करने का सिलसिला चलता रहा। उनके मुताबिक करीब 34 करोड़ के आसपास का सम्पत्ति कर, जलकर और अन्य टैक्स जमा हुआ है और उसका मिलान भी किया जा रहा है। इस बार नगर निगम को खासा राजस्व मिला है। आने वाले दिनों में बड़े बकायादारों से भी राशि वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी और जिनके प्रकरण बनाए गए हैं, उनकी सम्पत्तियों की भी नीलामी की जाएगी।
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