
इंदौर। धुलैंडी के चार दिन पूर्व आज शहर के मंदिरों में रंगभरी एकादशी प्राचीन परंपरा अनुसार मनाईं जा रही है। भक्तों ने मंदिरों में अपने अपने आराध्य को अबीर-गुलाल अपर्ण कर होली पर्व की शुरुआत की। शहर के भूतेश्वर महादेव मंदिर पंचकुईया , गेदेशवर शिवधाम परदेशीपुरा, जबरेश्वर महादेव मंदिर राजबाड़ा, इन्द्रेश्वर महादेव मंदिर पंढरीनाथ, गुटकेश्वर महादेव मंदिर किला मैदान, खजराना गणेश मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, गीताभवन सहित सभी देवालयों में भक्तों ने घरों से लाएं अबीर-गुलाल और फूल भगवान को अर्पित किए और फाग महोत्सव भी मनाएं जाएंगे। आज आयुष्मान योग में रंगभरी एकादशी मनाई जा रही है।

आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि काशी , उज्जैन , मथुरा, वृंदावन, गोकुल सहित अन्य कई तीर्थस्थलों में इस एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माता पार्वती के विवाह के बाद इसी दिन भगवान शिव उन्हें पहली बार गौना कराकर काशी लेकर आए थे। यह एकादशी हिंदी वर्ष की अंतिम एकादशी है। इस एकादशी पर व्रत-उपवास करने के साथ ही पर आंवले के वृक्ष की पूजा भी की जाती है। इसके अलावा भक्त रंगभरी ग्यारस पर अपने इष्टदेव को रंग चढ़ाकर होली पर्व की शुरुआत करते हैं। दान-पुण्य भी करते हैं।
आज ही के दिन भोले माता पार्वती को काशी लाए थे
रंगभरी एकादशी बाबा भोलेनाथ के भक्तों के लिए बहुत खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के ही दिन भगवान शिव माता गौरी को गौना कराकर काशी लाए थे। इसलिए ये दिन काशी में मां पावर्ती के स्वागत के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है और पूरे नगर में जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया जाता है। आज बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है। इस दिन से काशी और पूरे देश में होली का पर्व शुरू हो जाता है, जो लगातार रंगपंचमी तक चलती है।
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