
नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Draupadi Murmu) ने कहा कि आदिवासी युवाओं को (Tribal Youth) शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ना चाहिए (Should Progress through Education and Skill Development) । उन्होंने शनिवार को दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में यह बात कही ।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह संथाल समुदाय के लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने करीब 240 साल पहले शोषण के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया था। उनके बगावत के करीब 60 साल बाद, बहादुर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने बहादुर फूलो-झानो के साथ मिलकर 1855 में संथाल हुल का नेतृत्व किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उस साल, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले साल, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर, संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी स्क्रिप्ट बनाई थी। हाल ही में, हमने इस इन्वेंशन की 100वीं सालगिरह मनाई है। उनके योगदान ने संथाल भाषा बोलने वालों को अपनी बात कहने का एक नया मौका दिया। उन्होंने “बिदु चंदन,” “खेरवाल वीर,” “दलेगे धन,” और “सिदो कान्हू – संताल हुल” जैसे नाटक भी लिखे। इस तरह, उन्होंने संथाल समुदाय में साहित्य और सामाजिक चेतना की रोशनी फैलाई। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय के लोगों को दूसरी भाषाएं और स्क्रिप्ट पढ़नी चाहिए, लेकिन अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदायों ने सदियों से अपने लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को बचाकर रखा है। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रकृति संरक्षण का सबक आने वाली पीढ़ियों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोक परंपराओं और पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ, हमारे आदिवासी समुदायों को आधुनिक विकास को अपनाना चाहिए और तरक्की की यात्रा पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि संथाल समुदाय समेत आदिवासी समुदायों के लोग तरक्की और प्रकृति के बीच तालमेल की मिसाल कायम करेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान देना ज़रूरी है। आदिवासी युवाओं को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन इन सभी कोशिशों में उन्हें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे हमें एक सशक्त समाज और एक मजबूत भारत बनाने में मदद मिलेगी।
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