
नई दिल्ली।हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब भी कपूर परिवार का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले राज कपूर (Raj Kapoor) की छवि सामने आती है जिनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी, लेकिन इस चमकदार विरासत (legacy) की बुनियाद जिस शख्स ने सबसे पहले रखी वह थे उनके चाचा त्रिलोक कपूर (Trilok Kapoor)।आज की पीढ़ी (generation) भले उन्हें कम जानती हो, लेकिन एक दौर ऐसा था जब उनकी लोकप्रियता चरम पर थी और हिट फिल्मों का उनका रिकॉर्ड आज तक कपूर खानदान का कोई हीरो (hero) नहीं तोड़ पाया।
कपूर परिवार की जड़ें पेशावर से जुड़ी रहीं। परिवार के मुखिया दीवान बशेश्वरनाथ कपूर के बड़े बेटे थे पृथ्वीराज कपूर जिन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाई लेकिन दीवान साहब की दूसरी पत्नी से जन्मे त्रिलोक कपूर परिवार के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने बतौर हीरो पर्दे पर राज किया। वर्ष 1928 में पेशावर से निकलकर वे कलकत्ता पहुंचे। वहीं उनके भीतर अभिनय का जुनून जागा और स्वतंत्रता आंदोलन के माहौल ने उनके व्यक्तित्व को नई दिशा दी।
साल 1933 में फिल्म चार दरवेश से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद फिल्म सीता ने उन्हें पहचान दिलाई जिसमें उनके भाई पृथ्वीराज कपूर भी नजर आए। धीरे धीरे त्रिलोक कपूर 1930 और 1940 के दशक के लोकप्रिय सितारों में शुमार हो गए। 1950 का दशक तो मानो उनके नाम रहा जब उन्होंने एक के बाद एक सफल फिल्में दीं। खास बात यह रही कि उन्होंने कई मिथकीय फिल्मों में भगवान के किरदार निभाए और दर्शकों ने उन्हें आस्था और श्रद्धा के साथ स्वीकार किया। उस दौर में उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि यदि आज की तरह सोशल मीडिया होता तो वे ट्रेंडिंग स्टार होते। अपने करियर में उन्होंने लगभग 30 हिट फिल्में दीं और यह आंकड़ा आज भी कपूर परिवार के लिए एक रिकॉर्ड बना हुआ है।
समय के साथ सिनेमा बदला और 1970 के दशक में त्रिलोक कपूर ने मुख्य भूमिकाओं से दूरी बनाकर चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरू कीं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया जिनमें तूफान और दोस्ताना जैसी फिल्में शामिल रहीं। फिल्म गंगा जमुना सरस्वती में उन्होंने अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया और एक बार फिर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
उनकी निजी जिंदगी भी सिनेमा से जुड़ी रही। उनके बड़े बेटे विजय कपूर निर्देशक बने और फिल्मों का निर्देशन किया। 1988 में त्रिलोक कपूर का निधन हो गया लेकिन उनकी विरासत आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में दर्ज है।
कपूर परिवार की चर्चा जब भी होगी तो राज कपूर ऋषि कपूर या रणबीर कपूर के साथ साथ उस पहले हीरो का नाम भी लिया जाएगा जिसने इस विरासत की नींव रखी। त्रिलोक कपूर केवल एक अभिनेता नहीं थे बल्कि वह उस दौर की आस्था लोकप्रियता और स्टारडम का प्रतीक थे जिनकी चमक समय बीतने के बाद भी फीकी नहीं पड़ी है।
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