
नई दिल्ली । ट्रंप प्रशासन (Trump administration) की दूसरी पारी के पहले वर्ष में अमेरिका (America) में भारतीय छात्रों (Indian students) के एडमिशन (Admission) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्रों के एनरोलमेंट में 75% तक की कमी आई है, जो दशकों में सबसे तेज गिरावट है। सलाहकारों का कहना है कि वीजा अस्वीकृति दर में वृद्धि और सीमित स्लॉट्स के कारण छात्रों में हिचकिचाहट बढ़ी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में हैदराबाद स्थित कंसल्टेंसी आई20 फीवर के अरविंद मंडुवा का बयान है। उन्होंने कहा कि दशकों में पहली बार इतनी तेज गिरावट देखी गई है, जहां शीर्ष 40 अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आवेदन करने से छात्र कतराने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय छात्रों के कुल आवेदनों में भी 19% की कमी के साथ जुड़ी हुई है। इसमें भारत से आने वाले छात्रों की संख्या में 44% की अतिरिक्त गिरावट शामिल है। इस कमी के पीछे मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियां हैं, जिनमें वीजा प्रोसेसिंग में देरी, 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, छात्र वीजा आवेदकों की बढ़ी हुई जांच और डिपोर्टेशन की धमकी शामिल हैं। अमेरिकी एफ-1 छात्र वीजा की अस्वीकृति दर दशक के उच्चतम स्तर 41% पर पहुंच गई है, जबकि भारत से आवेदनों में 45% की कमी आई है।
भारतीय छात्रों का क्यों मोहभंग हो रहा
कनाडा में भी भारतीय छात्रों के लिए अस्वीकृति दर 74% तक बढ़ गई है, लेकिन अमेरिका का प्रभाव अधिक गहरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जांच और पोस्ट-एंट्री स्क्रीनिंग के कारण 1 लाख से अधिक वीजा रद्द किए गए, जिनमें 8 हजार छात्र वीजा शामिल हैं। ये नीतियां न केवल छात्रों को प्रभावित कर रही हैं बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों की आय और नवाचार को भी नुकसान पहुंचा रही हैं, क्योंकि भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय छात्रों का एक तिहाई हिस्सा बनाते हैं। इस स्थिति के चलते भारतीय छात्रों और पेशेवरों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे अमेरिका के अलावा अन्य देशों जैसे यूके या कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved