
नई दिल्ली। भारत(India) और यूरोपीय यूनियन(European Unio) के बीच मुक्त व्यापार समझौता(free trade agreement) होने पर अमेरिका भड़क गया(United States is angered) है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट(US Treasury Secretary Scott Bessent) ने कहा कि यूरोप(Europ) अपने ही खिलाफ युद्ध की फंडिंग(funding) कर रहा है। उन्होंने भारत को सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा(He did not directly criticize India) है।
अमेरिका एक तरफ(US claim) भारत का हितैषी(friend of India,) होने का दावा करता है तो दूसरी तरफ समय-समय पर अपनी चिढ़(periodically expresses) भी निकालता(displeasure) रहता है। अब यूरोपीय यूनियन(European Union) के साथ होने वाली भारत की ट्रेड डील(India’s trade deal) पर डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump’s) के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत पर रूसी तेल को लेकर अमेरिका ने टैरिफ लगाए लेकिन यूरोपीय देश उनके साथ नहीं खड़े हुए। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश अपने ही खिलाफ युद्ध की फंडिंग कर रहे हैं और यह सब रूस के तेल के माध्यम से हो रहा है।
बेसेंट ने कहा, हमने भारत पर रूस से तेल खरीदने के एवज में 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया। आप अनुमान लगाइए कि पिछले सप्ताह क्या हुआ? ईयू ने भारत के साथ ट्रेड डील साइन कर ली। हालांकि भारत ने कहा है कि ट्रेड डील पर अभी साइन नहीं हुए हैं, बल्कि केवल सौदे को अंतिम रूप दिया गया है। बता दें कि रूस से तेल आयात का बहाना करके ही अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील के लिए वार्ता धीमी गति से आगे बढ़ रही है। इसी बीच यूरोपीय यूनियन के साथ हुई ट्रेड डील से अमेरिका को जैसे झटका लग गया है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को ही जानकारी दी है कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए अपनी बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि भारतीय नजरिये से यह व्यापार समझौता संतुलित और भविष्योन्मुखी है, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के बेहतर आर्थिक एकीकरण में मदद करेगा।
सौदे को दिया गया है अंतिम रूप
अग्रवाल ने भरोसा जताया(Agarwal expresse) कि इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं(two economies) में व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। वाणिज्य सचिव ने घोषणा की, ”वार्ता सफलतापूर्वक पूरी हो गई है और सौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है।” उन्होंने आगे बताया कि इस समय समझौते के मसौदे की कानूनी जांच चल रही है। सरकार की कोशिश इन प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर समझौते पर हस्ताक्षर करने की है।
उन्होंने कहा, उम्मीद है कि इस समझौते पर इसी साल हस्ताक्षर किए जाएंगे और यह अगले साल की शुरुआत में प्रभावी हो सकता है। समझौते के कार्यान्वयन में समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए यूरोपीय संसद की मंजूरी अनिवार्य है, जबकि भारत में केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की सहमति की आवश्यकता होती है। यह समझौता 18 साल की लंबी बातचीत के बाद पूरा हुआ है। वार्ता वर्ष 2007 में शुरू हुई थी।
वार्ता पूरी होने की औपचारिक घोषणा मंगलवार को यहां होने वाले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 जनवरी को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर वार्ता करेंगे।
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