img-fluid

ट्रंप की टैरिफ नीति के उल्टे परिणाम, दावा विदेशी कंपनियों पर बोझ डालने का था….भुगत रहे US के लोग

February 18, 2026

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की बहुचर्चित टैरिफ नीति (Tariff policy) पर एक नई रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दावा किया गया था कि आयात शुल्क (Import Duty) का बोझ विदेशी कंपनियों और सरकारों पर पड़ेगा, लेकिन ताजा अध्ययन में सामने आया है कि इन शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत खर्च अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने ही उठाया। यह निष्कर्ष फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयार्क (Federal Reserve Bank of New York) से जुड़े अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण में सामने आया है।

यूएसए टुडे ने बताया कि छह फरवरी को जारी एक नामी टैक्स फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अनुमान है कि 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, वहीं 2026 में यह बोझ बढ़कर 1300 डॉलर होने का अनुमान है।


  • रिपोर्ट के मुताबिक आयातित वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क का अधिकांश हिस्सा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में अमेरिकी बाजार में ही खपा दिया गया। विदेशी निर्यातकों ने अपने दामों में सीमित कटौती की, जिससे लागत का बोझ घरेलू कंपनियों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच गया। ऐसे में यह अध्ययन न केवल ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि संरक्षणवादी कदमों का वास्तविक असर अक्सर घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़ता है।

    अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा सीधा असर
    रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए। ट्रंप ने दावा किया था कि इन शुल्कों का भुगतान विदेशी कंपनियां और सरकारें करेंगी। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि वास्तविकता इससे अलग रही। विश्लेषण के अनुसार, आयातित वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क का अधिकांश हिस्सा अमेरिकी आयातकों ने चुकाया, जिसने आगे चलकर कीमतों में वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर बोझ डाला। यानी टैरिफ एक तरह से घरेलू कर (टैक्स) की तरह काम करता रहा, जिसका प्रभाव रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा।

    विदेशी निर्यातकों ने नहीं घटाए दाम
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों के दाम में बहुत कम कटौती की। इसका अर्थ यह है कि वे टैरिफ का बोझ खुद वहन करने के बजाय अमेरिकी खरीदारों पर डालने में सफल रहे। परिणामस्वरूप, आयातित सामान महंगे हुए और अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ी।

    महंगाई पर प्रभाव
    अध्ययन में यह संकेत भी दिया गया है कि टैरिफ का प्रभाव महंगाई दर पर पड़ा। जब कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो वे अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करती हैं। इससे व्यापक स्तर पर मूल्य वृद्धि देखने को मिलती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टैरिफ को अक्सर व्यापार घाटा कम करने या घरेलू उद्योगों की रक्षा के उपाय के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन यदि उसका भार मुख्य रूप से घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़े तो नीति के लाभ सीमित हो सकते हैं।

    आगे की राह
    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार नीति बनाते समय उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों का आकलन जरूरी है। यदि टैरिफ का अधिकांश भार घरेलू अर्थव्यवस्था पर ही पड़ता है, तो इससे उपभोक्ता खर्च, निवेश और प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर हो सकता है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक व्यापार की जटिलताओं के बीच किसी भी देश द्वारा उठाया गया संरक्षणवादी कदम अंततः उसके अपने बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भविष्य की व्यापार नीतियों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार करने की जरूरत है।

    Share:

  • 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का एलान, भारत-फ्रांस के बीच रक्षा-तकनीकी क्षेत्रों में भी बड़े समझौते

    Wed Feb 18 , 2026
    मुंबई. भारत (India) और फ्रांस (France) ने मंगलवार को अपने रिश्तों को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने अपनी दोस्ती को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (‘Special Global Strategic Partnership’) में बदल दिया है। मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) के बीच हुई […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved