
नई दिल्ली। इस बार आम बजट 2026-27 (General Budget 2026-27) में पारंपरिक नेशनल हाईवे (Conventional National Highway.) की लंबाई बढ़ाने के बजाय ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे (Green and Electric National Highway) को प्राथमिकता दी जाएगी। यही कारण है गत वर्ष की अपेक्षा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की बजटीय सहायता में महज 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आम बजट में बड़े नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं। इसमें सड़क निर्माण के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी को पहली प्राथमिकता दी जा सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से इस बार विभाग को 2.92 लाख करोड़ रुपये (पिछले वर्ष से 1.8 फीसदी ज्यादा) की बजटीय सहायता मिल सकती है। सरकार का पीपीपी मोड के तहत अधिक से अधिक राशि जुटाने का प्रयास होगा।
इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के लिए 5000 करोड़ का विशेष फंड
सरकार सड़कों के मुद्रीकरण से अतिरिक्त 35,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखेगी। इसे सीधे ग्रीन प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा। बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के लिए 5000 करोड़ का विशेष फंड का प्रावधान किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि आम बजट में दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चुनिंदा सेक्शन को पायलट इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के रूप में विकसित करने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की जा सकती है।
इसमें स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओवरहेड केबल तकनीक, भारी ट्रकों के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों का ट्रायल अब बड़े स्तर पर शुरू किया जाएगा। हर 40-50 किलोमीटर पर सड़क किनारे फास्ट चार्जिंग स्टेशनों के लिए निजी ऑपरेटरों को 20-25 फीसदी की कैपिटल सब्सिडी मिलने की उम्मीद है। बजट में 10,000 से 11,000 किलोमीटर हाईवे निर्माण का लक्ष्य रखा जा सकता है। यानी प्रतिदिन 27 से 30 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा।
सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग
सरकार अब सर्कुलर इकोनॉमी के तहत नई सड़कों के निर्माण में नगर निगम के कचरे और प्लास्टिक के अनिवार्य उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इसमें सड़क बनाने वाली कंपनियों को कार्बन क्रेडिट दिए जाएंगे, जिन्हें वे बाजार में बेच सकेंगी।
सैटेलाइट से टोल कलेक्शन
इस साल मंत्रालय सैटेलाइट टोलिंग योजना शुरू करेगा। इसके तहत टोल प्लाजा के बजाय सैटेलाइट से टोल टैक्स कलेक्शन किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत होगी और ट्रैफिक जाम नहीं होगा। सड़क बनाने से पहले उसका डिजिटल मॉडल तैयार होगा, जो निर्माण की गलतियों में कमी और पारदर्शिता लाएगा। सरकार नया बिजनेस मॉडल ला सकती है, जहां निजी कंपनियां हाईवे पर बिजली की बुनियादी संरचना लगाएंगी और ट्रकों से बिजली खपत के आधार पर शुल्क वसूलेंगी।
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