
नई दिल्ली । दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) के अंतिम संस्कार (Funeral) में बॉलीवुड (Bollywood) की कई जानी-मानी हस्तियों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी फिल्ममेकर (Marathi Filmmaker) और अभिनेता प्रवीण तरड़े (Pravin Tarde) ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नाना पाटेकर का कद किसी फिल्म उद्योग की पहचान से बड़ा था और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले हजारों किसानों (Farmers) की मौजूदगी उनके प्रति लोगों के सम्मान को दिखाती है। तरड़े ने यह भी कहा कि कम से कम उन लोगों को अंतिम विदाई देने पहुंचना चाहिए था, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे।
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में निधन हो गया था। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र के पुणे जिले के डोंजे गांव में स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और कुछ फिल्मी हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, बॉलीवुड के अधिकतर चर्चित चेहरों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। इसी मुद्दे पर प्रवीण तरड़े ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रवीण तरड़े ने अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि नाना पाटेकर का लोगों से जुड़ाव केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। उनके मुताबिक, अंतिम यात्रा में महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से हजारों किसान पहुंचे थे। तरड़े ने किसानों की मेहनत और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी किसी भी फिल्मी पहचान से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बॉलीवुड के सितारों के नहीं पहुंचने से नाना पाटेकर की महानता कम नहीं हो जाती।
तरड़े ने नाना पाटेकर की पहचान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नाना खुद को केवल बॉलीवुड अभिनेता के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि किसान के रूप में अपनी पहचान को महत्व देते थे। तरड़े के अनुसार, धुले से आया एक किसान भी उनके लिए बॉलीवुड के किसी बड़े हीरो से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा अपनी किसान वाली पहचान का उल्लेख करते थे और आम लोगों से उनका जुड़ाव उनकी खासियत थी।
हालांकि, प्रवीण तरड़े ने फिल्म उद्योग के लोगों की अनुपस्थिति को लेकर अपनी शिकायत भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नाना अपना मित्र मानते थे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार में जरूर शामिल होना चाहिए था। तरड़े ने इस बात पर निराशा जताई कि अभिनेता के साथ व्यक्तिगत या पेशेवर संबंध रखने वाले अधिक लोगों ने अंतिम विदाई में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में किसी छोटे अभिनेता के निधन पर कई लोग सफेद कपड़े पहनकर अंतिम दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं, लेकिन नाना पाटेकर के मामले में वैसी मौजूदगी दिखाई नहीं दी।
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर सहित कुछ फिल्मी हस्तियां शामिल हुई थीं। इनके अलावा अनीस बज्मी, मकरंद अनासपुरे, प्रसाद ओक और राहुल देशपांडे जैसे नाम भी अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। इसके बावजूद बॉलीवुड की सीमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठे। तरड़े ने अपनी बात में किसानों और आम लोगों की मौजूदगी को विशेष महत्व दिया और कहा कि नाना के प्रति उनका सम्मान ही अभिनेता के व्यक्तित्व और उनके सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है।
नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने अभिनय के लिए पहचाने जाते थे। प्रवीण तरड़े की प्रतिक्रिया में उनके फिल्मी योगदान के साथ-साथ आम लोगों और किसानों से उनके संबंधों का भी उल्लेख सामने आया। तरड़े का कहना है कि किसी कलाकार का महत्व केवल इस बात से तय नहीं होता कि उसके अंतिम संस्कार में फिल्म उद्योग के कितने लोग पहुंचे, बल्कि उससे भी अहम यह है कि आम लोग उसे कितना सम्मान देते हैं।
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