
वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Donald Trump Administration) ने वीजा नीति (Visa Policy) में बढ़ा बदलाव किया है। अब पर्यटक और कारोबारी वीजा लेने के लिए 50 देशों को नागरिकों को वीजा बॉन्ड (Visa Bond) देना होगा। नए नियमों के तहत इन 50 देशों के लोगों को अब अमेरिकी वीजा लेने के लिए करीब 10 से 20 हजार डॉलर का बॉन्ड लेना पड़ सकता है। इस लिस्ट से भारत को बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों (Indian citizens) के ऊपर इन निर्देशों का कोई असर नहीं होगा। हालांकि, भारत के पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और नेपाल सहित कई अन्य देश के नागरिक इस लिस्ट में हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से उन देशों की लिस्ट जारी की गई, जिनके नागरिकों को अब वीजा बॉन्ड देना होगा। एक नागरिक अमेरिकी वीजा के लिए कितने हजार डॉलर का बॉन्ड देगा यह उसके वीजा इंटरव्यू के आधार पर तय होगा। इसमें मुख्य रूप से तीन क्रम रखे गए हैं। काउंसलर अधिकारी आवेदकों के इंटरव्यू के आधार पर उन्हें 10, 15 या 20 हजार के वीजा बॉन्ड की लिस्ट में बांट सकता है।
बता दें, भारत के पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश के लोगों के ऊपर यह नियम 21 जनवरी से लागू है, जबकि हाल ही में भूटान को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इस लिस्ट में अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, पश्चिम एशिया समेत अन्य क्षेत्रों के देश भी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक उनके इन नए नियमों का लक्ष्य अमेरिका में आने वाले विदेशी नागरिकों के जरूरत से ज्यादा रुकने पर रोक लगाना है।
बॉन्ड जमा करने पर भी वीजा की गारंटी नहीं
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसा नहीं है कि अगर आपका वीजा बॉन्ड जमा किया जाता है। उसके बाद आपका वीजा पक्का हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांसुलर अधिकारियों को वीजा जारी करने से पहले बॉन्ड जमा करवाने का अधिकार है। हालांकि, इसके बाद भी वीजा देना है या नहीं यह अमेरिकी विदेश विभाग के ऊपर निर्भर करेगा।
बता दें, अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन शुरुआत से ही दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों के लिए सख्त नियम अपना रहा है। पिछले दो सालों से ट्रंप सरकार ने अप्रवासियों को लेकर काफी कड़े नियम अपनाए हैं। कभी दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों की दम पर बसा अमेरिका, ट्रंप सरकार में गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में आ रहे लोगों को हवाईजहाज में भरकर उनके देश भेजने के लिए भी जाना जाता है। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ऐसा कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की जन्म आधारित नागरिकता संबंधी नियम को भी बदलने की कोशिश की है।
वर्तमान नियमों के मुताबिक अमेरिका में आने वाले लोगों को अब सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें कमर्शियल प्लेन सर्विस और अमेरिकी सीमा शुल्क और प्री क्लीयरेंस सर्विस का उपयोग करना होगा। इसके अलावा वह सामान्य चार्टर विमानन, चार्टर विमानों, समुद्री बंदरगाहों का उपयोग नहीं कर सकते।
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