न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को 2021 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप को इज़राइल-संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शांति समझौते में उनकी भूमिका के लिए, नार्वे के एक सांसद क्रिस्चियन टायब्रिंग-गेजेड द्वारा नामित किया गया है. ट्रंप की मध्यस्थता के बाद ही दोनों देशों के बीच ये समझौता हो पाय था. इजराइल और यूएई ने 13 अगस्त को इस समझौते का एलान किया था.
यूएई और इजराइल के बीच शांति समझौते ने दुनिया के कूटनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया. ये समझौता इसलिए खास है, क्योंकि अभी तक मिडिल ईस्ट के दो देशों को छोड़कर कोई भी इजराइल को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं देता है. लेकिन अब यूएई ने भी इजराइॢल को मान्यता दे दी है.
ये समझौता भारत के लिए कैसा है?
भारत का सीधे तौर पर इस समझौते से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन समझौते के पीछे छिपी बातें भारत के हक में हैं. इस्लामिक देश यूएई और यहूदियों के देश इजराइल के बीच ये शांति समझौता अमेरिका ने कराया है. क्योंकि अमेरिका को मीडिल ईस्ट में ईरान से बदला लेना है और चीन के पर भी कतरने हैं. चीन, ईरान के जरिए इस इलाके में दाखिल हो रहा था. ईरान की ना तो यूएई से और ना ही इजराइल से बनती है.
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