वॉशिंगटन। ईरान की सत्ता (Iran’s ruling power) संभालने के बाद नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को लेकर अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने बड़ा दावा किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई परमाणु हथियार विकसित करने के पक्ष में अपने पिता अली खामेनेई की तुलना में अधिक आक्रामक रुख रखते हैं। दावा किया गया है कि युद्ध से पहले इंटरसेप्ट की गई बातचीत के विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि ईरान के भीतर परमाणु हथियार समर्थक गुट पहले से अधिक प्रभावशाली हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई ने देश की कमान संभाली। अमेरिकी एजेंसियों का आकलन है कि नए नेतृत्व में ईरान भविष्य में संभावित सैन्य हमलों से बचाव के लिए परमाणु क्षमता को रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में देख सकता है।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपने हजारों सेंट्रीफ्यूज नतांज के पास स्थित ‘पिकैक्स माउंटेन’ की गहरी भूमिगत सुरंगों में स्थानांतरित कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस सुविधा को इस तरह तैयार किया गया है कि हवाई हमलों से इसे नुकसान पहुंचाना बेहद कठिन हो।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी पहले भी संकेत दे चुके हैं कि वर्ष 2021 से इस क्षेत्र में परमाणु गतिविधियों से जुड़े निर्माण कार्यों के संकेत मिलने लगे थे।
आईएईए के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हालिया संघर्ष शुरू होने से पहले ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440 किलोग्राम से अधिक यूरेनियम मौजूद था। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर हथियार-ग्रेड 90 प्रतिशत संवर्धन के काफी करीब माना जाता है और अतिरिक्त प्रोसेसिंग के बाद इसका उपयोग परमाणु हथियारों के निर्माण में किया जा सकता है।
वर्ष 2025 में अमेरिकी सेना ने फोर्डो, इशफहान और नतांज स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बावजूद ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। 22 जुलाई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने दोहराया कि देश की सभी परमाणु गतिविधियां आईएईए के नियमों के तहत घोषित और निगरानी में हैं।
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