
नई दिल्ली। मध्य पूर्व(Middle East) की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। ईरान के सर्वोच्च नेता(The death of Iran’s Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई(Ayatollah Ali Khamenei) की मौत और अमेरिका-इजराइल के हमलों(US-Israeli attacks) ने पूरे क्षेत्र को तनाव की आग में झोंक दिया है। ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों (Iranian drone and missile attacks.)के जवाब में खाड़ी देशों में स्थिति और नाजुक हो गई है। इसी बीच अमेरिकी विदेश विभाग(US State Department) ने अपने नागरिकों के लिए तत्काल सुरक्षा चेतावनी(urgent security alert) जारी की है।
विदेश विभाग की सहायक मंत्री (कांसलर अफेयर्स)(State Department Assistant Secretary for Consular Affairs) मोरा नामदार(Mora Namdar) ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी नागरिकों को उपलब्ध विकल्पों के जरिए जल्दी से जल्दी इन 15 देशों को छोड़ना चाहिए। ये देश हैं: बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजराइल, वेस्ट बैंक और गाजा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन। हाल के दिनों में विभाग ने इन देशों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियां भी अपडेट की थीं और यात्रा से बचने की सलाह दी थी।
स्थिति और गंभीर हो गई है। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में अमेरिकी दूतावास के कर्मियों को खतरे के कारण परिसर से हटाया गया और इमरजेंसी टास्क फोर्स सक्रिय कर दी गई। वहीं, सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी ड्रोन हमले से आग लगने की खबर सामने आई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चार से पांच सप्ताह तक जारी रह सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे लंबा भी रखा जा सकता है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह संघर्ष अंतहीन नहीं होगा और अमेरिका-इजराइल का लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।
स्थिति का विश्लेषण बताता है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, लेकिन संघर्ष अभी जारी है और इसके व्यापक प्रभाव पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई दे सकते हैं। अमेरिकी नागरिकों के लिए यह चेतावनी सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम है।
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