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‘चाहे जो भी बने, हमारा निशाना होगा’, नए सुप्रीम लीडर को इजराइल की धमकी

March 04, 2026

डेस्क: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले करीब पांच दिनों से जंग चल रही है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके मोज्तबा को ईरान का प्रमुख बनाया गया है. मतलब अब मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर हैं. ईरान के इस ऐलान के बाद इजराइल ने खुली धमकी दी है. इजराइल के रक्षा मंत्री का कहना है कि चाहे भी सुप्रीम लीडर बने, वो हमारा निशाना होगा.

इजराइल के रक्षा काट्ज ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट बयान दिया है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ईरान के आतंकी शासन की ओर से इस्राइल को नष्ट करने, अमेरिका, आजाद दुनिया, क्षेत्र के देशों को धमकाने और ईरानी लोगों को दबाने की योजना को जारी रखने और उसका नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया गया हर नेता हमारा निशाना बनेगा. इजराइल किसी को भी नहीं छोड़ेगा. माना जा रहा है कि इजराइल अयातुल्ला अली खामेनेई की तरह ही उनके बेटे को भी निशाना बनाएगा.



  • तेहरान स्थित असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 56 वर्षीय मोज्तबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है. मोज्तबा , दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बड़े बेटे हैं. वो पिछले काफी समय से अपने पिता के साथ ही काम कर रहे थे. हाल में अमेरिका और इस्राइल के हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद से नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। बताया जा रहा है कि मोज्तबा की दावेदारी को मजबूत थी, हालांकि वे किसी प्रमुख धार्मिक पद पर नहीं रहे हैं. लेकिन उन्हें देश की सेना और असेंबली का सपोर्ट है.

    एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते वर्ष अली खामेनेई ने संभावित उत्तराधिकारियों की सूची में मोज्तबा का नाम शामिल नहीं किया था. वहीं, शिया धार्मिक परंपरा में सत्ता का पिता से पुत्र को हस्तांतरण आम तौर पर स्वीकार्य नहीं माना जाता, जिससे यह फैसला और अधिक चर्चा का विषय बन गया है. कहा जा रहा है कि ईरान की जनता अयातुल्ला के बेटों में से किसी एक को सुप्रीम लीडर देखना चाहती थी. लोगों की भावनाओं को देखते हुए ये फैसला लिया गया है.

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोज्तबा का चयन में आईआरजीसी का प्रभाव रहा है. इसी के चलते उन्हें ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है. हालांकि मोज्तबा की नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने लंबे समय से वंशवाद की आलोचना की है और खुद को एक सिद्धांत आधारित व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया है. ऐसे में ये बड़ा सवाल है कि मोज्तबा का भविष्य क्या होगा.

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