
जबलपुर। जबलपुर स्थित नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने बिजली उपभोक्ताओं को सस्ते कोयले का लाभ नहीं मिलने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। संस्था ने विद्युत नियामक आयोग को ईमेल भेजकर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करने की मांग की है। मंच का कहना है कि कोयले के दामों में कमी आने के बावजूद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में फ्यूल सरचार्ज घटाने के बजाय उसे बढ़ा दिया गया है। मंच के अनुसार 22 सितंबर 2025 से कोयले पर 400 रुपये प्रति टन सरचार्ज हटा लिया गया था। इस कटौती से बिजली उत्पादन की लागत कम हुई है और नियमानुसार इसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए था। बिजली के रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर दी गई आपत्ति के दौरान विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश के पृष्ठ 191 इश्यू क्र. 26 में यह स्पष्ट किया था कि नियामक आयोग और बिजली कंपनियां इस घटी हुई लागत का लाभ फ्यूल सरचार्ज के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी गई।
आंकड़ों में दिख रही विसंगति
मंच ने सितंबर के बाद के 6 महीनों के फ्यूल सरचार्ज का तुलनात्मक अध्ययन किया है। फ्यूल सरचार्ज का निर्धारण 2 माह पूर्व की फ्यूल कॉस्ट के आधार पर किया जाता है। इस गणना के तहत संस्था ने नवंबर माह से अध्ययन शुरू कर इसकी तुलना अक्टूबर के फ्यूल सरचार्ज से की है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया कि कोयला सस्ता होने के बाद भी फ्यूल सरचार्ज कम होने के बजाय बढ़ता चला गया। यह स्थिति नियामक आयोग के उस आश्वासन के विपरीत है जिसमें लागत घटने पर उपभोक्ताओं को वित्तीय लाभ देने की बात कही गई थी। संस्था द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 में सरचार्ज माइनस 4.73 फीसदी था। इसके बाद नवंबर 2025 में यह बढ़कर माइनस 2.23 प्र.श. हो गया। दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा माइनस 1.05 प्र.श. पर पहुंच गया। जनवरी 2026 में इसमें फिर बढ़ोतरी हुई और यह माइनस 1.58 प्र.श. रहा। फरवरी 2026 में अक्टूबर की तुलना में बढ़कर यह माइनस 1.71 प्रतिशत दर्ज किया गया। मार्च 2026 में यह माइनस 0.63 फीसदी तक पहुंच गया। इन सभी महीनों में पिछले आंकड़ों की तुलना में लगातार बढ़त देखी गई है जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, टीके रायघटक, डीके सींग, सुभाष चंद्रा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, डीआर लखेरा और पीएस राजपूत ने सामूहिक रूप से नियामक आयोग को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने को कहा है। मंच ने मांग की है कि बिजली कंपनियों द्वारा की जा रही इस अनियमितता की जांच की जाए ताकि उपभोक्ताओं को उनके अधिकार का लाभ मिल सके।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved