हरियाणा। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में सामने आया यह सास-बहू का मामला हर किसी को हैरान कर देने वाला है.एक बेटे ने अपनी ही पत्नी के खिलाफ कोर्ट (High Court) का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि उसकी पत्नी, जिसने उसकी मां को जिंदा जला दिया, उसे बालिग मानकर कड़ी सजा दी जाए. लेकिन हाईकोर्ट ने बेटे की मांग को साफ शब्दों में खारिज कर दिया.
कम उम्र में शादी बना बड़ा मुद्दा
कोर्ट ने इस केस में आरोपी की कम उम्र में शादी को भी बेहद गंभीर पहलू माना. रिकॉर्ड के मुताबिक, जब उसकी शादी हुई, तब उसकी उम्र 15 साल से भी कम थी. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे सामाजिक और पारिवारिक हालात में किसी नाबालिग से वयस्क जैसी समझ की उम्मीद करना गलत होगा.
मानसिक जांच में देरी पर सवाल
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत की जाने वाली प्रारंभिक मानसिक जांच घटना के करीब चार साल बाद कराई गई. तब तक आरोपी बालिग हो चुकी थी. कोर्ट ने साफ कहा कि मौजूदा मानसिक स्थिति से यह तय नहीं किया जा सकता कि अपराध के समय उसकी सोच और समझ कैसी थी.
निचली अदालत का फैसला बरकरार
हाईकोर्ट ने माना कि 2024 में JJB और अक्टूबर 2025 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला पूरी तरह सही और कानून के अनुरूप है. इसी के साथ पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को बिना दम का बताते हुए खारिज कर दिया गया.
पूरा मामला क्या है?
मामला 23 जून 2020 का है. घरेलू विवाद के दौरान बहू पर आरोप लगा कि उसने सास पर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी. महिला गंभीर रूप से झुलस गई और जुलाई 2020 में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 302 (हत्या) जोड़ दी. मृत महिला का बेटा और आरोपी बहू का पति चाहता था कि उसकी पत्नी को नाबालिग नहीं, बल्कि बालिग मानकर ट्रायल किया जाए, ताकि उसे सख्त से सख्त सजा मिल सके.
इस मांग के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) और ट्रायल कोर्ट पहले ही फैसला दे चुके थे कि आरोपी को नाबालिग मानकर ही मुकदमा चलेगा. इसी आदेश को चुनौती देते हुए पति हाईकोर्ट पहुंचा था.
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