
नई दिल्ली। सरकार ने संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए लोकसभा में कुल 18 घंटे तय किए हैं। यह चर्चा दो, तीन और चार फरवरी को होगी। यह फैसला गुरुवार को लोकसभा की व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार फरवरी को बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का लोकसभा में जवाब देंगे। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में 2026-27 के केंद्रीय बजट पर 5, 9, 10 और 11 फरवरी को आम चर्चा होगी। इस चर्चा के लिए भी कुल 18 घंटे तय किए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 11 फरवरी को जवाब देने की उम्मीद है।
मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की, जिनमें मनरेगा की बहाली, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण और यूजीसी से जुड़ा विवाद शामिल है। इस बीच, लोकसभा को गुरुवार दोपहर स्थगित कर दिया गया। अब एक फरवरी को सुबह 11 बजे फिर से बैठक करेगी।
नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जिसमें भविष्य की आर्थिक योजनाओं से पहले देश की आर्थिक स्थिति का खाका पेश किया जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण को देश की अर्थव्यवस्था का आधिकारिक वार्षिक ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। पिछले एक साल के आर्थिक प्रदर्शन का आंकड़ों के साथ विस्तृत विश्लेषण और भविष्य की नीतियों के लिए एक व्यापक दिशा दी जाती है। यह सरकार की प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट होती है, जो पिछले 12 महीनों के प्रमुख आर्थिक विकास योजनाओं की समीक्षा करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र 2026 से पहले संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने भारत की मजबूत विकास यात्रा पर जोर दिया। उन्होंने इस तिमाही की शुरुआत को ‘बहुत सकारात्मक’ बताया। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास के साथ भारत आज दुनिया के उम्मीद की किरण बना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ‘रिफॉर्म (सुधार) एक्सप्रेस’ पर सवार हो चुका है और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से बाहर निकलते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र से पहले बाधाएं खड़ी करने के बजाय समाधान खोजने का समय है।
बजट सत्र में 65 दिनों में कुल 30 बैठकें होंगी और यह दो अप्रैल को समाप्त होगा। दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और 9 मार्च को फिर से बैठक करेंगे, ताकि स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की जांच कर सकें।
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