वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) की राजनीति को हिला देने वाले हमले की पटकथा महीनों पहले लिखी जा चुकी थी। दावा है कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रणनीति के तहत ईरान की राजधानी तेहरान (tehran) में ऐसा सटीक हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को निशाना बनाया गया। यह पूरा ऑपरेशन महज 60 सेकंड में अंजाम दिया गया, लेकिन इसकी तैयारी महीनों तक चली।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी Central Intelligence Agency (CIA) और इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad ने खामेनेई की गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखी। सैटेलाइट इमेज, ड्रोन, सिग्नल इंटेलिजेंस और लोकल एजेंटों की मदद से तेहरान में उनके संभावित ठिकानों की पहचान की गई।
बताया जाता है कि जून 2025 में 12 दिनों तक चले ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान भी खामेनेई को निशाना बनाने का मौका था, लेकिन तब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इजरायल को रोक दिया था। आशंका थी कि ऐसा कदम पूरे मिडिल ईस्ट को भड़का सकता है।
फरवरी 2026 में ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए 10–15 दिन की चेतावनी दी। इस बीच जिनेवा में बैकडोर बातचीत चली, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधियों और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थता ओमान के विदेश मंत्री ने की। लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
उधर इजरायल का दावा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। साथ ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की ओर से भी कड़ा रुख अपनाने का दबाव बताया गया।
CIA को सूचना मिली कि 28 फरवरी की सुबह तेहरान के एक सुरक्षित परिसर में खामेनेई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं। जानकारी साझा होने के बाद हमले की टाइमिंग बदली गई।
इजरायली समयानुसार सुबह 6 बजे फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी। सुबह 9:40 बजे तेहरान के उस कॉम्प्लेक्स पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया गया। दावा है कि एक मिनट के भीतर 12 बम गिराए गए। पास की इमारत में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, जबकि दूसरी इमारत में खामेनेई अपने परिवार के साथ थे।
हमले के तुरंत बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के अन्य सैन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि खामेनेई की मौत की पुष्टि में समय लगा। कथित तौर पर बिल्डिंग से मिली तस्वीरों की पहले CIA और फिर मोसाद ने पुष्टि की। इसके बाद 1 मार्च तड़के ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत का दावा किया।
कई घंटों तक ईरान ने इन खबरों को अफवाह बताया, लेकिन बाद में सरकारी मीडिया ने खामेनेई के निधन की पुष्टि की।
घोषणा के बाद ईरान में व्यापक शोक और आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और जवाबी कार्रवाई की मांग करने लगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना क्षेत्रीय संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकती है और पश्चिम एशिया में तनाव नए स्तर पर पहुंच सकता है।
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