
1 अप्रैल के बाद शिकायत करने वाले नागरिक को 5 हजार इनाम, राशि अधिकारी से वसूली जाएगी
इंदौर। इंदौर (Indore) जिले में जमीन (land) से जुड़े मामलों में राजस्व विभाग (Department of Revenue) की सुस्ती अब किसी अभियान के बहाने से नहीं ढंक सकेगी। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे बुनियादी प्रकरणों में हजारों फाइलें महीनों से धूल खा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि लगभग 6,500 विवादित और अविवादित नामांतरण के प्रकरण लंबित पड़े हैं, जबकि बंटवारे के 570 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 511 प्रकरण तीन माह से ज्यादा समय से अटके हुए हैं। वहीं सीमांकन में भी 1500 से ज्यादा की पेंडेंसी है।
एसआईआर, प्रोटोकॉल, जनगणना हो या भागीरथपुरा अब राजस्व वसूली की पेंडेंसी और लंबित मामलों को लेकर अधिकारियों के कोई भी बहाने काम नहीं आएंगे। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर जिले में 13 से 30 मार्च तक विशेष राजस्व अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के माध्यम से लंबित राजस्व मामलों को तेजी से निपटाया जाएगा। साथ ही प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की कीमत सीधे अधिकारियों को चुकानी पड़ेगी। अभियान के तहत 28 फरवरी 2026 तक लंबित सभी राजस्व मामलों को प्राथमिकता से निपटाने का आदेश दिया गया है। यदि 1 अप्रैल 2026 के बाद भी कोई पुराना प्रकरण लंबित मिलता है और कोई नागरिक इसकी सूचना देता है तो उसे 5 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। यह राशि संबंधित राजस्व अधिकारी से ही वसूली जाएगी।
6 माह से निराकरण का इंतजार
आंकड़े बताते हैं कि जमीन की नपती, यानी सीमांकन और नामांतरण के मामलों में भी हालात चिंताजनक हैं। जिले में कुल 16,441 सीमांकन प्रकरण दर्ज किए गए थे, जिनमें से 14,992 का सीमांकन किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद 1,450 से अधिक मामले तीन माह से पेंडिंग पड़े हैं। इतना ही नहीं, करीब 1,400 प्रकरण छह माह तक विभिन्न कारणों से अटकाए रखे गए। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 65 से अधिक जमीनों की नपती छह माह से ज्यादा समय बीतने के बावजूद नहीं हो पाई है। ऐसे में किसानों और जमीन मालिकों को लगातार दफ्तरों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। साइबर तहसील प्रक्रिया लागू होने के बावजूद 6000 से अधिक प्रकरण नामांतरण के लिए अटके पड़े हैं। राजस्व मामलों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ता है। नामांतरण नहीं होने से जमीन की खरीद-फरोख्त रुक जाती है, बंटवारा लंबित रहने से परिवारों में विवाद बढ़ते हैं और सीमांकन नहीं होने से जमीन विवाद लगातार गहराते जाते हैं। इसके बावजूद कई मामलों में फाइलें महीनों तक अधिकारियों की टेबल पर अटकी रहती हैं।
छुट्टियां निरस्त, निर्देश तत्काल काम पर लौटे
वित्तीय वर्ष समाप्त होने के पहले कल भोपाल से ली गई मुख्य सचिव अनुराग जैन की बैठक में सख्त निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जिसके बाद अभियान के दौरान राजस्व अधिकारियों के पूर्व स्वीकृत अवकाश भी निरस्त कर दिए गए हैं और सभी अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में लंबित मामलों की भौतिक समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी प्रकरणों को आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज कर उनकी नियमित मॉनीटरिंग की जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अपने क्षेत्र की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपेंगे और पूरे अभियान की समीक्षा 1 अप्रैल को की जाएगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved