
भोपाल। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की पांचवी रिपोर्ट के अनुसार मप्र में पांच साल तक के 72 फीसदी बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं 15 से 19 साल की 58 फीसदी टीनएजर्स (लड़कियां) और 30 फीसदी टीनएजर्स (लड़के) एनीमिया से ग्रस्त हैं। बच्चों में बढ़ती खून की कमी को जांचनें के लिए अब स्वास्थ्य विभाग साल में एक बार हर बच्चे के हीमोग्लोबिन की जांच कराएगा। एनएचएम ने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूलों और आंगनबाडियों के बच्चों की साल में एक बार हीमोग्लोबिन की जांच कराने के आदेश दिए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के आयुष मेडिकल ऑफीसर, सीएचओ और एएनएम डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से बच्चों में खून की जांच करेंगे। एक मिनट में ही बच्चों में एनीमिया का पता लग सकेगा।
हेल्थ वर्कर्स को दी जाएगी टेस्टिंग किट
एनएचएम की तरफ से स्कूलों और आंगनबाडियों में साल में एक बार हीमोग्लोबिन की जांच करने के लिए एनएचएम की ओर से स्वास्थ्य कर्मियों को हीमोग्लोबिनोमीटर और स्ट्रिप दी जाएगी। इससे स्कूल और आंगनवाड़ी में एक मिनट के भीतर ही बच्चों में खून की कमी की जांच हो सकेगी। कम हीमोग्लोबिन वाले बच्चों को उपचार मुहैया कराया जा सकेगा। वहीं किशोरी बालिकाओं को आयरन फोलिक एसिड की टेबलेट भी दी जाएंगी।
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