
भोपाल। मप्र हाईकोर्ट ने नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव महापौर की तरह प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से कराने को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि एक बार अधिसूचना जारी हो जाने के बाद चुनाव पर अंतरिम रोक नहीं लगाई जा सकती। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की ग्रीष्म अवकाशकाीन युगलपीठ ने मामले की सुनवाई नियमित बेंच में करने की व्यवस्था दे दी। जबलपुर निवासी पीजी नाजपांडे ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है। जिसमें केवल नगर निगम के महापौर का चुनाव सीधे जनता से कराने का निर्णय लिया गया। याचिका में मांग की गई है कि महापौर की तरह ही नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष यानी सीधे जनता से कराया जाए।
कोर्ट को बताया कि पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने नगर पालिक अधिनियम की धारा-9 में संशोधन कर नगर निगम के महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया है। वहीं सरकार ने अध्यादेश जारी कर नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव चुने गए पार्षदों से कराने का निर्णय लिया है। याचिका में दलील दी गई कि दोनों की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं है। राज्य सरकार का ये कदम भेदभावपूर्ण है।
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