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एग्जाम देने के लिए निकला बेटा हो गया गायब, अब 18 साल बाद घर लौटा

January 04, 2026

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले (Muzaffarpur District) से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक (Emotional) कर दिया है. 18 साल 5 महीने पहले लापता (Missing) हुआ एक युवक (Person) आखिरकार अपने घर (Home) सकुशल लौट आया. जिस बेटे को परिवार ने वर्ष 2007 में मृत मानकर उसका सांकेतिक रूप से अंतिम संस्कार तक कर दिया था, वही बेटा जब अचानक माता-पिता के सामने जीवित खड़ा हुआ तो खुशी का ठिकाना न रहा. अपने जिगर के टुकड़े को सामने देखकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.

यह कहानी मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर गांव, वार्ड संख्या-8 निवासी विश्वनाथ शाह और रामपरी देवी के छोटे पुत्र रौशन कुमार की है. रौशन वर्ष 2007 में मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद अचानक लापता हो गया था. बताया जाता है कि वह गलत संगत में पड़ गया था और कुछ दोस्तों के साथ दिल्ली जाने के लिए घर से निकला था. यात्रा के दौरान वह ट्रेन में अपने साथियों से बिछड़ गया. मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वह न तो घर का पता याद रख सका और न ही वापस लौट पाया.


  • परिजनों ने बेटे की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी. दिल्ली समेत कई शहरों में उसकी खोज की गई, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला. उस समय पिता विश्वनाथ शाह सरकारी सेवा में कार्यरत थे और उन्होंने हर संभव प्रयास किया. लगातार असफलता और सामाजिक दबाव के चलते परिवार पूरी तरह टूट गया. आखिरकार, गहरे दुख और मजबूरी में परिवार ने रौशन को मृत मान लिया और समाज के कहने पर उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया.

    इधर, रौशन छपरा क्षेत्र में इधर-उधर भटकता हुआ पाया गया. सेवा कुटीर नामक सामाजिक संस्था से जुड़े लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया. बाद में भोजपुर जिले के कोईलवर स्थित मानसिक चिकित्सालय में उसका इलाज कराया गया. इलाज और काउंसलिंग के दौरान रौशन ने अपने पिता का नाम और गांव की जानकारी बताई. इसके बाद सेवा कुटीर, जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों ने लंबी प्रक्रिया के तहत उसके परिजनों की पहचान की और उनसे संपर्क किया.

    28 दिसंबर को सामाजिक संगठन से सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार छपरा पहुंचा. जैसे ही मां रामपरी देवी ने रौशन को देखा, उन्होंने बिना किसी संदेह के अपने बेटे को पहचान लिया. मां-बेटे के मिलन का वह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं. 1 जनवरी को रौशन को उसके पैतृक गांव लाया गया, जहां बेटे को जीवित देखकर माता-पिता फूट-फूटकर रो पड़े.

    रामपरी देवी ने कहा कि वर्षों से दिल में दबी उम्मीद आज पूरी हो गई. परिवार ने सेवा कुटीर, सारण जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के प्रति आभार व्यक्त किया. परिजनों ने बताया कि रौशन तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा है. फिलहाल उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह ठीक नहीं है और परिवार अब उसके इलाज और देखभाल में जुट गया है.

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