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दुनिया के सामने खुद को आर्थिक महाशक्ति बताने वाला चीन, डगमगाती अर्थव्यवस्था

January 13, 2026

बीजिंग। दुनिया के सामने चीन (China) खुद को आधुनिकता, तेज रफ्तार विकास और आर्थिक महाशक्ति (Economic superpower) के रूप में पेश करता रहा है। ऊंची गगनचुंबी इमारतें, बुलेट ट्रेनों (Skyscrapers, bullet trains) का विशाल नेटवर्क और वैश्विक बाजारों में बढ़ती मौजूदगी उसकी इसी छवि को मजबूत करती हैं। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो आने वाले समय में बड़े आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।

 

ब्लूमबर्ग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ताजा रिपोर्ट्स ने साफ किया है कि चीन की अर्थव्यवस्था भीतर से कमजोर होती जा रही है और कर्ज का बोझ खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इस वक्त डिफ्लेशन यानी अपस्फीति की चपेट में है।

बाजारों में सामान की कोई कमी नहीं है, लेकिन ग्राहक लगातार गायब होते जा रहे हैं। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के चलते चीन में करीब 70 रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से भी ज्यादा तेजी से गिर रही हैं। फैक्ट्रियां लगातार उत्पादन कर रही हैं, पर घरेलू खपत कमजोर बनी हुई है।



  • कंपनियों को माल बेचने के लिए कीमतें इतनी घटानी पड़ रही हैं कि मुनाफा कमाना तो दूर, लागत निकालना भी चुनौती बन गया है। कर्ज का पहाड़ और सरकारी दावों पर सवाल रिपोर्ट में चीन के बढ़ते कर्ज को सबसे बड़ी चिंता बताया गया है। भले ही बीजिंग सरकार जीडीपी को पांच प्रतिशत के आसपास दिखा रही हो, लेकिन स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज के आंकड़े कहीं ज्यादा गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

    अनुमान है कि 2025 के अंत तक चीन का सरकारी कर्ज करीब 18.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, बाहरी कर्ज 2.37 से 2.44 ट्रिलियन डॉलर के बीच आंका जा रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति निजी और घरेलू कर्ज की है। निजी क्षेत्र का कर्ज इतनी तेजी से बढ़ा है कि वह अब चीन की जीडीपी के बराबर या उससे भी अधिक स्तर पर पहुंच चुका है। वर्ष 2016 में जहां कर्ज-जीडीपी अनुपात 106 प्रतिशत था, वहीं अब यह कई गुना बढ़कर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सेवा क्षेत्र की रफ्तार हुई धीमी ब्लूमबर्ग के विश्लेषण के अनुसार, चीन का सेवा क्षेत्र पिछले कुछ महीनों में लगातार कमजोर पड़ा है।



  • हालात यह हैं कि सेवाओं से जुड़ा ग्रोथ इंडेक्स छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। होटल, ट्रैवल, रिटेल और बिजनेस सर्विसेज जैसे सेक्टर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। कमजोर घरेलू मांग और उपभोक्ताओं के सतर्क खर्च का असर सीधे इस सेक्टर पर दिख रहा है। निर्यात के सहारे खड़ा विकास का ढांचा इतने भारी कर्ज के बावजूद चीन की जीडीपी में बढ़ोतरी का मुख्य कारण निर्यात बताया जा रहा है।

    घरेलू बाजार में न बिक पाने वाला माल चीन आक्रामक तरीके से विदेशी बाजारों में भेज रहा है। दशकों में चीन की प्रति व्यक्ति आय जरूर बढ़ी है-1960 के दशक में 100 डॉलर से भी कम रहने वाली प्रति व्यक्ति जीडीपी 2024-25 में करीब 13,800 डॉलर तक पहुंच गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरक्की कर्ज और निर्यात की बैसाखियों पर टिकी हुई है। आगे का रास्ता जोखिम भरा आर्थिक इतिहास गवाह है कि जब किसी देश का कर्ज उसकी वास्तविक आय और उत्पादन क्षमता से तेज बढ़ता है, तो संकट टलना मुश्किल हो जाता है।

    ब्लूमबर्ग रिपोर्ट चेतावनी देती है कि चीन आज उसी नाजुक मोड़ पर खड़ा है। चमकदार विकास के पीछे छिपा कर्ज का गड्ढा अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो यह न सिर्फ चीन बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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