
नई दिल्ली. ग्रीनलैंड (Greenland) की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ती दिख रही हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्रीनलैंड के प्रीमियर (Premier) को सीधी धमकी दी है. ट्रंप ने साफ कहा कि वो प्रीमियर को नहीं जानते, और आने वाले वक्त में वो मुसीबत में होंगे. बता दें कि, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को जिस तरह ट्रंप ने उठवा लिया, उसके बाद ग्रीनलैंड इस धमकी को हल्के में नहीं लेगा.
ग्रीनलैंड में सरकार के मुखिया यानी प्रधानमंत्री को Premier कहा जाता है. फिलहाल जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ग्रीनलैंड के पीएम हैं. मंगलवार को उन्होंने ट्रंप को दो टूक कहा था कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और वे लोग डेनमार्क के साथ ही रहना चाहते हैं.
इस पर जब ट्रंप से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘खैर, यह उनकी समस्या है. मैं उनसे असहमत हूं. मैं नहीं जानता कि वह कौन हैं. उनके बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता. लेकिन यह उनके लिए एक बड़ी समस्या बनने वाली है.’
बता दें कि नील्सन की तरफ से मंगलवार को बयान आया था. उन्होंने कहा, ‘हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, हम डेनिश नहीं बनना चाहते, हम ग्रीनलैंडर बनना चाहते हैं. ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंड के लोगों द्वारा ही तय किया जाएगा.’ आगे उन्होंने दोहराया, ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और न ही किसी देश द्वारा खरीदा या नियंत्रित किया जा सकता है.’
ग्रीनलैंड में डर का माहौल
प्रधानमंत्री नील्सन भले साफ तौर पर अमेरिकी हस्तक्षेप को नकार रहे हैं. लेकिन ट्रंप की धमकी का डर ग्रीनलैंड में साफ दिख रहा है. ग्रीनलैंड की मंत्री ने खुद इसका सबूत दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, खनिज संसाधन मंत्री नाजा नथानिएलसन (Naaja Nathanielsen) ने दावा किया कि ट्रंप की धमकियों के बाद ग्रीनलैंड की जनता की रातों की नींद उड़ी हुई है.
डेनमार्क और अमेरिका इस हफ्ते इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मिलने वाले हैं. ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है. इसके अन्य दो इलाके डेनमार्क और फरो द्वीप समूह हैं. क्षेत्रफल के हिसाब से डेनमार्क इन तीनों में सबसे बड़ा है. कानूनी रूप से ग्रीनलैंड के नागरिक डेनमार्क के नागरिक हैं.
रूस और चीन का डर दिखा रहे ट्रंप
बता दें कि ट्रंप ने बार-बार कहा है कि रूस या चीन को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज संपदा से भरपूर आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोकने के लिए वॉशिंगटन को ग्रीनलैंड का स्वामित्व हासिल करना होगा. उनका कहना है कि वहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति काफी नहीं है.
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