
इंदौर (Indore)। बीआरटीएस (BRTS) का मामला फिलहाल उलझा पड़ा है, क्योंकि हाईकोर्ट ने प्रशासन, निगम सहित ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी को भी अब तलब किया है और 19 जनवरी को इसकी फिर से सुनवाई होना है। चूंकि सारी प्रक्रिया अब हाईकोर्ट के हवाले ही हो गई है, जिसके चलते निगम भी इंतजार कर रहा है कि हाईकोर्ट क्या आदेश देगा। दूसरी तरफ कबाड़ी ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और उसके पहले उसने जो रैलिंग निकाली थी, उसे लगभग 10 लाख रुपए में बेच दिया, जिसकी भनक पडऩे पर निगम ने सामान व बची रैलिंग जब्त कर अपनी निगरानी में रख ली है। पहले मुख्यमंत्री और उसके बाद हाईकोर्ट ने ही साढ़े 11 किलोमीटर के बीआरटीएस को हटाने का फैसला सुनाया था।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जीपीओ चौराहा पर रात साढ़े 11 बजे पहुंचकर रैलिंग निकालने की नौटंकी की और उसके फोटो-वीडियो भी जारी कर पब्लिसिटी बटोर ली। मगर उसके बाद बीआरटीएस की तुड़ाई को लेकर हास्यास्पद स्थिति निर्मित हुई और पहले तो तीन बार के टेंडर में कोई ठेकेदार नहीं मिला और बाद में जो ठेकेदार मिला, उसने भी हाथ खड़े कर दिए, जिसके चलते स्थानीय ठेकेदार को जैसे-तेसे तैयार किया गया और उसके नाम पर एग्रीमेंट बनवाया और 7 लाख रुपए निगम ने जमा भी करवाए। दूसरा यानी पेटी कॉन्ट्रैक्टर भी भाग खड़ा हुआ, तब एक कबाड़ी ठेकेदार को पकड़ा गया। चूंकि हाईकोर्ट लगातार फटकार लगा रहा था, जिसके चलते एक तरफ की रैलिंग हटा दी गई और एक बस स्टॉप भी तोड़ा।
मगर बाद में इस कबाड़ी ठेकेदार ने भी काम बंद कर दिया और इसे घाटे का काम बताया और उसने जो खर्चा किया था, उसके आधार पर लगभग 10 लाख रुपए की रैलिंग और अन्य सामान बैच दिया। दूसरी तरफ निगम को जब यह बात पता लगी तो उसने बची हुई रैलिंग और अन्य सामान आजाद नगर जीटीएस और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर रखवा दिया। फिलहाल बीआरटीएस पर तुड़ाई का काम बीते कुछ दिनों से पूरी तरह से ठप पड़ा है और निगम का कहना है कि वह हाईकोर्ट आदेश का इंतजार कर रहा है, क्योंकि हाईकोर्ट ने ही ठेकेदार से लेकर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने वाले विभाग पीडब्ल्यूडी को भी तलब किया है।
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