
नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पारिवारिक विवाद (Family dispute) के हर मामले में ससुराल पक्ष ही आरोपी हो यह जरूरी नहीं है। महिलाएं भी कानून (Law) का गलत फायदा उठाती हैं। इसी तरह के एक मामले में पत्नी की ओर से मध्यस्थता के दौरान हर बार नई-नई मांग रखने को कोर्ट ने उसका लालची रवैया करार दिया।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए दहेज प्रताड़ना के मुकदमे को खारिज कर दिया। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यहां पत्नी का दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज कराने का मकसद आरोपी पति और ससुर से ज्यादा से ज्यादा धन पाने की लालसा थी।
अदालतों को कानून के दुरुपयोग को नियंत्रित करने की जरूरत
बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट तथ्य सामने आए कि यहां दहेज उत्पीड़न कानून का दुरुपयोग हो रहा है। बेंच ने कहा कि अदालतों को कानून के दुरुपयोग को नियंत्रित करने की जरूरत है। बेंच ने कहा कि पिछले कई वर्षों से एक परिवार दहेज प्रताड़ना के मुकदमे की वजह से पुलिस व अदालत के चक्कर काट रहा है। बेंच ने इस मामले में आरोपी बनाए गए पति और ससुर क्लीनचिट दे दी है।
शादी के दो साल बाद ही छोड़ा ससुराल
बेंच ने यह भी गौर किया कि शिकायतकर्ता महिला ने वर्ष 2011 में ही ससुराल छोड़ दिया था। उसके बाद वह कभी ससुराल नहीं गई, जबकि उसने पति व ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना समेत अन्य गंभीर आरोपों को लेकर वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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