
इंदौर। आईआईटी कॉलेज इंदौर के परिसर की 50 हेक्टयर जमीन पर भारत सरकार के सहयोग से लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से वन मण्डल इंदौर एक सिटी फ़ॉरेस्ट मतलब नया नगर वन तैयार कर रहा है । वन विभाग का दावा है कि यह नगर वन इस वित्तीय वर्ष के मार्च माह तक पर्यावरण प्रेमी शहर वासियों के लिए शुरू कर दिया जायगा।
इंदौर वनमण्डला अधिकारी आईएफएस प्रदीप मिश्रा के मुताबिक इस नए साल में शहर को 50 – 50 हेक्टयर के 2 नगरवन ( सिटी फ़ॉरेस्ट) की सौगात मिलने जा रही है। इस माह में जंहा देव गुराडिय़ा नगरवन का लोकार्पण सम्भावित है तो वंही मार्च माह में आईआईटी कॉलेज नगरवन शहर वासी पर्यावरण प्रेमियों के लिए विधिवत खोल दिया जायगा। आईएफएस मिश्रा के मुताबिक यह नया नगरवन मनोरंजन पिकनिक और इको पर्यटन के अलावा स्टूडेंट्स को प्रकृति से जोडऩे औऱ संस्थान के वैज्ञानिकों को पर्यावरण विज्ञान से सम्बंधित शोध अथवा अनुसंधान में सहायक बनेगा।
यँहा दुर्लभ औषधीय सहित 50 से अधिक प्रजाति के पेड़ पौधे लगाए गए है। यंहा पर एक तालाब भी मौजूद है ।इस वजह से कई प्रकार के वन्य जीव पंक्षियो का मनपसंद वन बना हुआ है। इस नगरवन का उद्देश्य एज्युकेशन मतलब शिक्षा के साथ- साथ पिकनिक पर्यटन प्राकृतिक मनोरंजन सहित जंगलो का महत्व औऱ पर्यावरण संरक्षण की अहमियत समझाना है। कुल मिला कर अब नगरवन सिर्फ जंगल ही नही बल्कि प्रकृति से आध्यात्मिक तरीक़े से जुड़ाव, पर्यावरण शिक्षा, मानसिक शांति और सामुदायिक जीवन के जीवंत केंद्र बनने जा रहे है ।
क्लास रूम में नगर वन
डीएफओ मिश्रा के अनुसार यह नगर वन एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है ।यंहा नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग ट्रैक, हरित लैंडस्कैप, जल संरचनाएं, बैठने के स्थान, वॉच टॉवर, प्रवेश द्वार, रोड, आंतरिक पथ, साइन बोर्ड, सोलर लाइटिंग, फेंसिंग और विजि़टर सुविधाएँ विकसित की जा रही है जाएँगी। यह क्षेत्र इस तरह से बनाया जा रहा है कि लोग जंगल के करीब आएँ, लेकिन उसकी संवेदनशीलता बनी रहे। यह नगर वन केवल आईआईटी के छात्रों और स्टाफ के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खुला रहेगा।
दुर्लभ प्रजाति की वनस्पतियों की नर्सरी भी बनाएंगे
इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दुर्लभ, संकटग्रस्त और संकटापन्न (क्रश्वञ्ज) प्रजातियों के लिए नर्सरी की स्थापना है।नगरवन की शर्तों के अंतर्गत आईआईटी को वन विभाग के सहयोग से यह नर्सरी विकसित करनी है। यहाँ छात्र बीज संग्रह, पौध तैयार करने और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में भाग लेंगे, जिससे वे इंदौर के आरईटी संरक्षण अभियान का हिस्सा बन सकें।
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