
नई दिल्ली । भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना किसी उत्सव से कम नहीं होता है। पूरा परिवार (family event)ही जमाई की खातिरदारी में लगा हुआ होता है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार व्यवस्थाएं करते हैं और उनका स्वागत करते हैं। लेकिन कई बार यह स्वागत अपनी हदें पार कर जाता है। ऐसा ही हुआ आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) कोनसीमा जिले के एक गांव में। यहां पर एक परिवार ने मकर संक्रांति(Makar Sankranti) के त्योहार पर अपने दामाद और बेटी को घर पर बुलाया। पारंपरिक (traditional welcome)तरीके से उनका स्वागत करते हुए सारी तैयारियों को इतना विशाल रूप से दिया कि यह कार्यक्रम (family event)आसपास के कई गांवों में चर्चा का विषय बन गया। इतना ही नहीं इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।
आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के अदुर्र गांव में एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ को पहली बार घर बुलाया। पहली बार मायके आ रही बेटी के स्वागत में परिवार इसे यादगार बनाने के लिए बेहद भव्य स्वागत की योजना बनाई, जो अपने विशाल आकार के कारण अलग नजर आया।
ऑनलाइन दी गई जानकारी के अनुसार, परिवार ने इस मौके पर 1,374 तरह के खाने और मिठाइयों की तैयारी की। यह विशाल भोज गोदावरी डेल्टा की समृद्ध खाद्य संस्कृति को दर्शाता है, जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है। कार्यक्रम स्थल पर स्वागत संदेशों वाले सजे-धजे बोर्ड लगाए गए थे, जिससे आयोजन में एक निजी और भावनात्मक स्पर्श जुड़ गया। इन सभी बातों से साफ दिखता है कि जोड़े को खास महसूस कराने के लिए कितनी मेहनत की गई।
सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर शेयर किए जा रहे वीडियो में नवविवाहित जोड़ा एक साथ बैठा दिखाई दे रहा है। उनके ठीक सामने ही भोजन रखा हुआ है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर करीने से सजे व्यंजनों की कतारों पर घूमता है।
बिरयानी और बर्गर से लेकर तले हुए स्नैक्स, छाछ, ताजे जूस, मिठाइयां, फल, घर में बने नाश्ते और कई अन्य व्यंजन इसमें शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।
भोजन के अलावा, परिवार ने जमाई और बेटी को 12 तोहफे भी दिए। ये तोहफे साल के 12 महीनों का प्रतीक थे और नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए दिए गए थे।
लोगों ने लिए मजे
जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, लोगों ने अपने-अपने हिसाब से कमेंट भी करने शुरू कर दिए। एक यूजर ने लिखा, “इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते, उन्हें खुशी मिलती और दुआएं भी।” एक अन्य ने टिप्पणी की, “मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा।”दूसरे यूजर ने लिखा, “यही लोग दहेज मांगे जाने पर रोते हैं। एक और ने कहा, “गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं।” एक टिप्पणी में यह भी कहा गया, “काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।”
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