
नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से सोना और चांदी (gold and silver) के दाम हर दिन रिकॉर्ड हाई पर पहुंच रहे थे. चांदी के दाम एक साल में लगभग 3 गुना बढ़े हैं, जबकि सोने की कीमत (gold price) करीब 80 फीसदी चढ़ी है. चांदी का रिकॉर्ड हाई लेवल 3.35 लाख रुपये प्रति किलो है, जबकि सोने का रिकॉर्ड हाई लेवल 1.58 लाख रुपये है.
हालांकि, मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) में गुरुवार को इसके दाम में भारी गिरावट देखने को मिली है. 5 मार्च वायदा के लिए सुबह चांदी 20,000 रुपये और 5 फरवरी वायदा के लिए सोना 4000 रुपये सस्ता हुआ था, लेकिन शाम 6.20 बजे तक चांदी 9185 रुपये सस्ती होकर 3,09,307 रुपये प्रति किलो पर कारोबर कर रही थी.
इसी तरह, 5 फरवरी वायदा वाला सोना भी तेजी से गिरा था. 6.20 बजे तक एमसीएक्स पर 10 ग्राम सोने का भाव 1282 रुपये कम होकर 151580 रुपये पर थे. सोने और चांदी के दाम में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को देखा जा रहा है.
ट्रंप ने ऐसा क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और भारत के बीच जल्द डील होने की बात कही है. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के साथ अमेरिका की ट्रेड डील पर बात की और कहा कि हमारे बीच एक बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है. जिसका असर गोल्ड और सिल्वर पर पड़ा, क्योंकि निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार के प्रति ज्यादा बढ़ा और सोने-चांदी जैसे सेफ निवेश में प्रॉफिट बुकिंग शुरू हुई.
ट्रंप का दूसरा बयान ग्रीनलैंड को लेकर है. उन्होंने यूरोप के 8 देशों पर जो 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, उसे वापस ले लिया है और कहा है कि ग्रीनलैंड पर ऐसा प्लान पेश किया जाएगा, जो यूरोप देशों और अमेरिका दोनों के लिए अच्छा रहेगा. इस बयान से टकराव और तनाव की स्थिति कम हुई है. जिस कारण सोने-चांदी में मुनाफावसूली हावी हुई है.
इन वजहों से भी आई गिरावट
ट्रंप के बयान के अलावा, सोने और चांदी के दाम में गिरावट की बड़ी वजह सिल्वर और गोल्ड ईटीएफ में बिकवाली. गुरुवार को सिल्वर और गोल्ड ईटीएफ 16 फीसदी तक टूट गए, जिस कारण मेटल में भी गिरावट देखने को मिली. अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली है. रुपये और अन्य करेंसी की तुलना में डॉलर मजबूत हुआ, जिस कारण सोने-चांदी जैसे सेफ निवेश प्रभावित हुए
क्या आगे भी सस्ते होंगे सोने और चांदी के दाम?
सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह प्रॉफिट बुकिंग करेक्शन है. एक्सपर्ट इसे सेफ हैवेन डिमांड के घटने के कारण इस गिरावट को मान रहे हैं, यह मंदी या संरचनात्मक गिरावट नहीं है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में सिल्वर और गोल्ड रेट में थोड़ा दबाव दिखाई दे सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसमें मजबूती बनी रहेगी. लॉन्गटर्म में केंद्रीय बैंकों की खरीद, ग्लोबल इकोनॉमी अनिश्चितता और महंगाई बढ़ने का खतरा सोने और चांदी के दाम में तेजी ला सकता है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अगर आप सोने और चांदी में निवेश का प्लान बना रहे हैं तो आपको लॉन्गटर्म में हिसाब से सोचना चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में इन धातुओं में उतार-चढ़ाव रह सकता है. ऐसे में गिरावट पर खरीदारी ही सही रणनीति हो सकती है. लॉन्ग टर्म में ये मुनाफा करा सकते हैं.
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