
नई दिल्ली। परमाणु जासूसी(nuclear espionage) के अलावा झांग पर(Zhang has also) पदोन्नति(exchange for promotions) के बदले भारी रिश्वत लेने(large bribes), सेना के भीतर राजनीतिक गुट(forming political ) बनाने, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन(Central Military Commission) में अधिकारों का दुरुपयोग, और सैन्य खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार(corruption) को बढ़ावा देने जैसे कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी(China’s ruling Communist Party) और सेना(military) के शीर्ष नेतृत्व में उस समय भूचाल आ गया, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग(President Xi Jinping) के करीबी माने जाने वाले जनरल झांग(General Zhang Youxia,) यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू किए जाने की पुष्टि हुई। झांग चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA)(People’s Liberation Army (PLA) की सबसे शक्तिशाली हस्तियों में गिना जाता रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय(China’s Ministry) ने कहा है कि झांग के खिलाफ यह जांच “अनुशासन(serious violations) और कानून के गंभीर उल्लंघन”(discipline and law) के आरोपों के तहत शुरू की गई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर आरोपों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
परमाणु रहस्य लीक करने के आरोप
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, झांग पर चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी ‘मुख्य तकनीकी जानकारियां’ अमेरिका को लीक करने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अखबार का दावा है कि यह जानकारी चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के लिए आयोजित एक गोपनीय आंतरिक ब्रीफिंग में साझा की गई थी, जो जांच की सार्वजनिक घोषणा से ठीक पहले हुई। जांच के दायरे में आने वाले एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी जनरल लियू जेनली हैं, जो सीएमसी के सदस्य हैं। वह ‘ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट’ में ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक संक्षिप्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘सीपीसी केंद्रीय समिति द्वारा विचार-विमर्श के बाद, झांग यूक्सिया और लियू जेनली के खिलाफ जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया।’’
भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप
परमाणु जासूसी के अलावा झांग पर पदोन्नति के बदले भारी रिश्वत लेने, सेना के भीतर राजनीतिक गुट बनाने, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अधिकारों का दुरुपयोग, और सैन्य खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला चीन की सेना में व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि वर्षों से जमी हुई सत्ता और प्रभाव की पूरी नेटवर्क प्रणाली को तोड़ना है।
ली शांगफू केस से जुड़ता है मामला
इस जांच को चीन के पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू की बर्खास्तगी और पार्टी से निष्कासन से भी जोड़ा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा कार्रवाई यह संकेत देती है कि शी जिनपिंग सेना और रक्षा उद्योग पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि झांग के कार्यकाल में पदोन्नत हुए कई अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है, जो जांच की गंभीरता को दर्शाता है।
चीन की आधिकारिक चुप्पी और अंतरराष्ट्रीय अटकलें
चीन सरकार ने अब तक परमाणु डेटा लीक से जुड़े आरोपों की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि यह जांच कम्युनिस्ट पार्टी की भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति को दर्शाती है। हालांकि, परमाणु जासूसी जैसे आरोपों पर चुप्पी ने चीन के भीतर और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अटकलों और अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों की शंका
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के चीन मामलों के विशेषज्ञ नील थॉमस ने इन आरोपों पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि चीन का परमाणु कार्यक्रम बेहद सख्त नियंत्रण में रहता है और किसी एक जनरल के लिए इतनी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाना और उसे बाहर पहुंचाना आसान नहीं है। थॉमस के अनुसार, रिश्वत और पदोन्नति से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप, PLA के पिछले मामलों के अनुरूप अधिक प्रतीत होते हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि चीन में आंतरिक ब्रीफिंग्स कई बार राजनीतिक उद्देश्य से एकतरफा तस्वीर पेश करती हैं।
बहरहाल, जांच की खबर के बाद सोशल मीडिया पर झांग और एक अन्य वरिष्ठ जनरल की गिरफ्तारी, राष्ट्रपति सुरक्षा बलों से झड़प, और हजारों सैनिकों को नियंत्रण में लिए जाने जैसे सनसनीखेज दावे सामने आए हैं । इनकी न तो चीनी अधिकारियों ने पुष्टि की है और न ही पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 से अब तक 50 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारी या तो पद से हटाए जा चुके हैं या जांच के दायरे में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जनरल झांग योउश्या के खिलाफ जांच चीन की सैन्य संरचना, क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन, और एशिया-प्रशांत में शक्ति समीकरण पर दूरगामी असर डाल सकती है।
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