
इंदौर। नीलगाय के खिलाफ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के पहले वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में वन विभाग को कई गांव में 50 से ज्यादा ऐसे हॉटस्पॉट मिले हैं, जहां किसानों की फसलों पर नीलगाय का कहर कई सालों से लगातार जारी है। नीलगाय के आतंक वाले इलाकों का सर्वे पूरा होने के बाद सभी पीडि़त किसानों को रेस्क्यू ऑपरेशन का इंतजार है। अब देखना यह है प्रशासन, नीलगाय के कहर से किसानों को कब तक निजात दिलाता है।
नीलगाय के आतंक के कारण किसानों को हर साल लाखों रुपए का नुकसान झेलना पड़ता है। इस मामले में इन 50 गांवों के किसान सालों से तहसील कार्यालय से लेकर जिला जनपद पंचायत,उनके स्थानीय विधायक और सांसद, मंत्री सहित सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करते आ रहे हैं, मगर अभी तक कही कोई सुनवाई नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि जब शासन नेट्रेक्स मतलब नेशनल ऑटो टेस्टिंग सेंटर पीथमपुर को नीलगाय से बचाने के लिए हर साल रेस्क्य ऑपरेशन अभियान चला सकता है तो किसानो की फसलों को बचाने के लिए वह कोई कार्रवाई क्यों नही करता।
इन गांवों के खेतों में नीलगाय का आतंक जारी…
वन विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार देपालपुर, सांवेर, महू, मानपुर और इंदौर की दतौनी फायर रेंज के इलाके में 50 से ज्यादा हॉटस्पॉट मतलब गांव चिन्हित किये गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा देपालपुर के गांव शाहपुरा, नौगांवा सर्फ, सुमठा, गंगाजलखेड़ी, अटाहेड़ा, सुनाला, कटकोदा, पितावली, गुडर, रुदराख्या, खड़ोतिया, बान्याखेड़ी, उजालिया, खाडिय़ा, बड़ोदिया, मुरखेड़ा, नेवरी, चाटवाड़ा, अजन्दा, सुनावदा शामिल हैं। इन गांवों के किसानों का कहना है कि जिसे प्रशासन नीलगाय कहता है, वह कोई गाय नहीं है, न गाय की प्रजाति से इसका कोई सम्बन्ध है। यह जंगली जानवर घोड़ारोज है। इसे कई इलाकों में रोजड़ा तो कहीं अन्य जिलों में अलग -अलग नामों से जानते हैं। इसलिए प्रशासन इस जंगली जानवर को गाय समझ कर डरे नहीं, इसके खिलाफ जल्दी से रेस्क्यू ऑपरेशन के अलावा इनकी नसबंदी करें, जिससे इनकी संख्या में लगाम लगे।
देपालपुर, सांवेर, महू, मानपुर, दतौनी फायर रेंज नीलगाय के बड़े हॉटस्पॉट
इंदौर सोशल फॉरेस्ट्री डीएफओ (सर्वेक्षण के दौरान तत्कालीन जिला वन मण्डलाधिकारी) प्रदीप मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर रेस्क्यू ऑपरेशन अभियान चलाने के पहले वन कर्मचारियों के माध्यम से नीलगाय से ज्यादा प्रभावित इलाकों का सर्वे करवाया था। वन विभाग की सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार नीलगाय से सम्बंधित जिन हॉटस्पॉट को चिन्हित किया गया हैं, उनमें सांवेर, देपालपुर, दतौनी फायर रेंज, महू फॉरेस्ट रेंज, मानपुर फॉरेस्ट रेंज के भी कुुछ इलाके शामिल हैं।
हर साल लगभग 30 प्रतिशत फसलें चट कर जाती हैं नीलगाय
सांवेर के मुरादपुर गांव के किसान भाजपा किसान मोर्चा जिला मंत्री अरविंद सिंह राठौर ने अग्निबाण को बताया कि अकेले मुरादपुरा ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों में नीलगाय (घोड़ारोज) के कारण किसानों को लगभग 30 प्रतिशत फसलों का नुकसान झेलना पड़ता है। इस सम्बंध में सांसद, तहसील, से लेकर इंदौर जिला प्रशासन, जिला पंचायत सीईओ तक किसान कई बार गुहार लगा चुके हैं, मगर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती।
नीलगाय पर लगाम लगाने के लिए लगातार नसबंदी जरूरी
किसानों का कहना है कि इस समस्या का एक ही उपाय है। लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर इनकी नसबंदी कर जिले से बाहर घने जंगलों में छोड़ा जाए। इनकी वजह से किसान हर साल नुकसान झेलकर कर्जदार होते जा रहे हैं। कभी खराब मौसम तो कभी पानी की कमी तो कभी कीड़ों की मार के चलते तमाम मुश्किलों का सामना कर खेती करने वाले किसानों के लिए नीलगाय का कहर किसी काल से कम नहीं है।
नीलगाय का सबसे ज्यादा कहर देपालपुर के गांवों में
देपालपुर तहसील के शाहपुरा गांव के किसान लाखनसिंह गहलोत ने अग्निबाण को बताया कि नीलगाय का सबसे ज्यादा कहर देपालपुर तहसील के लगभग 20 गांवों में है। इस सम्बंध में पटवारी से लेकर विधायक, मंत्री , सांसद , अधिकारी कोई भी किसानों को इस समस्या से मुक्ति नहीं दिलवा पाया है।
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