
न शर्म.. न हया… और न ही दया… सनातनी (Sanatani) बनकर सरकार (Government) में आते हैं… और मुगलिया आतंक (Mughal terror) बरपाते हुए छीनने… झपटने… हड़पने की होड़ में लग जाते हैं….बरसों तक पाई-पाई जोडक़र अपना आशियाना बनाने-बसाने वाले लोगों के घर को सडक़ों के नाम पर रौंदकर बेघर करने वाली सरकार और प्रशासन की बुरी नजर अब इंदौर शहर के उस क्रिश्चियन कालेज की भूमि पर लग गई, जिसने पिछले 138 सालों से नि:स्वार्थ भाव से सफर करते हुए हजारों-लाखों छात्रों का न केवल भविष्य बनाया… बल्कि गांव-खेड़े की तरह पगडंडियों पर बसे इंदौर शहर में शिक्षा-सभ्यता का अलख जगाकर महानगर का रुतबा दिलाया… था क्या तब इंदौर में… जब क्रिश्चियन कालेज ने धरोहर धरी… थे कहां वो सरकार और प्रशासन के नुमाइंदे, जब इस शहर में जमीन की नहीं, लोगों को काबिल बनाने का बीड़ा एक संस्था ने उठाया… खेत-खलिहान की तरह बसे इंदौर शहर में एक किनारे स्थापित होने वाले जिस कालेज ने पूरे शहर को शिक्षा से समृद्ध बनाया…बिना पैसों के बच्चों को पढ़ाया…गरीब छात्रों के रहने तक का इंतजाम करवाया… खीसे निपोरने वाले फटेहाल फकीर लोगों को स्वाभिमान और सम्मान से जीने का रुतबा दिलाया… जिस कालेज ने कई नेताओं को सत्ता के दरवाजे तक पहुंचाया… जहां किशोर कुमार के सुरों ने अपना कमाल दिखाया…जिस कालेज से डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक कतार बनकर निकले, उस सरस्वती के मंदिर को उजाडऩे और अपना जमीर मारकर उसकी जमीन छीनने का प्रयास करने वाले लोग नासमझ… नाकारा और बेहया हो सकते हैं… लेकिन इस शहर के एहसान फरामोश होकर खामोश क्यों बैठे हैं…अपनी हैसियत का डंका बजाने वाले…नेतागीरी का रुतबा झाडऩे वाले… आलीशान आशियानों में जिंदगी बसर करने वालों ने भी कभी मुफलिसी में इस कालेज में अपने बचपन को संवारा होगा…लेकिन आज उसे उजाडऩे की कोशिशों से निगाहें फेर लेने से साफ जाहिर होता है कि वो शिक्षित नहीं जाहिल हैं… वो पैसों से अमीर हैं, लेकिन सोच से गरीब हैं… वो नेता हैं, मगर दिल-दिमाग से कमजोर हैं, जो यह नहीं सोच सकते हैं कि इस शहर में जब शिक्षा माफियाओं का बोलबाला है… जहां सरकारी स्कूलों में ताला है, वहां ऐसी चंद संस्थाएं आज भी कम पैसों में या बिना पैसों में शिक्षा की वो जरूरतें पूरी कर रही हैं, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है… अगर इंदौर जागृत है… इंदौरी चैतन्य हैं… कानून जिंदा है तो बुरी नजर वाले प्रशासन की आंखों का इलाज करना चाहिए… शिक्षा की वो धरोहर उजडऩे से बचना चाहिए…
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