
कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से पहले केंद्र सरकार (Central government) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक ‘सशक्त समिति’ का गठन किया है। 2024 में अधिसूचित CAA नियमों के तहत यह समिति विशेष रूप से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदन की जांच और मंजूरी के लिए अंतिम प्राधिकरण का काम करेगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि आवेदन पूरी तरह से वैध हों और आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के सभी मानदंडों को पूरा करें।
समिति की संरचना
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार समिति के सदस्य इस प्रकार हैं:
अध्यक्ष: डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना कार्य निदेशालय, पश्चिम बंगाल।
प्रमुख सदस्य:
सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का अधिकारी (उप सचिव स्तर या उससे ऊपर)।
क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) द्वारा नामित अधिकारी (अवर सचिव स्तर या ऊपर)।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पश्चिम बंगाल के राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी (अवर सचिव स्तर या ऊपर)।
पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित कोई डाक अधिकारी (उप सचिव स्तर या ऊपर)।
विशेष आमंत्रित सदस्य:
पश्चिम बंगाल सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव का प्रतिनिधि।
रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का प्रतिनिधि।
नागरिकता के लिए पात्रता और प्रक्रिया
नियम 11A के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के वे लोग जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में आए थे, नागरिकता के लिए पात्र हैं। आवेदन केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा किए जा सकते हैं।
राजनीतिक महत्व और मतुआ समुदाय
यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मतुआ समुदाय की प्रतीक्षा: बांग्लादेश से विस्थापित मतुआ और बंगाली हिंदू लाखों लोग लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
TMC का विरोध: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि CAA लागू होने से मतुआ समुदाय के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने समुदाय से CAA शिविरों से दूर रहने की अपील की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी।
गृह मंत्रालय का उद्देश्य इस सशक्त समिति के माध्यम से लंबित CAA आवेदनों को तेजी से मंजूरी दिलाना और पश्चिम बंगाल में CAA को लेकर फैले भ्रम को दूर करना है।
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