नई दिल्ली/हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति (Politics of Telangana) में उस समय विवाद गहरा गया, जब एन रामचंदर राव को रविवार को कामारेड्डी (Politics of Telangana) रवाना होने से पहले ही उनके आवास पर रोक दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि पुलिस ने शनिवार रात से ही उन्हें नजरबंद कर दिया, जिससे वे हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं कर सके।
उनका कार्यक्रम कामारेड्डी और बंसवाड़ा जाकर पथराव में घायल लोगों से मुलाकात करने का था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पीड़ितों से मिलने से रोकना इस बात का संकेत है कि सरकार विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाने नहीं देना चाहती।
स्थानीय विवाद तब उग्र हो गया जब भाजपा विधायक काटिपल्ली वेंकट रमण रेड्डी के कैंप कार्यालय पर हमला हुआ। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गर्मा गया।
20 और 21 फरवरी को विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। विवाद की जड़ सरकारी डिग्री कॉलेज की जमीन को लेकर बताया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान एक नेता की गाड़ी पलट दी गई, जबकि कई जगहों पर हिंसा में कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी घायल हुए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी।
सरकार पर विपक्ष को दबाने के आरोप
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उन पर “जबरन चुप रहने” का दबाव बनाया जा रहा है और राज्य सरकार नागरिक सुरक्षा के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में पार्टी से जुड़े अन्य नेताओं की गिरफ्तारी भी की गई है।
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने भी राज्य सरकार की कार्यशैली की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
राजनीतिक दल आमने-सामने
मामले ने अब राज्य की प्रमुख पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले लिया है। भाजपा का कहना है कि उसे राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की जा रही है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता बताया जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए भारत राष्ट्र समिति और एआईएमआईएम भी अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के साथ खड़े हैं।
नगर निकाय चुनाव नतीजों का भी असर
इस घटनाक्रम के बीच प्रदेश अध्यक्ष ने हालिया नगर निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उनका कहना है कि करीमनगर नगर निगम में पहली बार महापौर और उपमहापौर दोनों पद जीतना संगठन के लिए बड़ी सफलता है।
साथ ही आदिलाबाद और निजामाबाद समेत कई क्षेत्रों में पार्टी के मजबूत होने का दावा किया गया।
कानून-व्यवस्था बनाम राजनीतिक अधिकार की बहस
पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कार्रवाई शांति बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कदम था या फिर राजनीतिक टकराव का हिस्सा।
एक ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बता रहा है, तो दूसरी ओर सरकार समर्थक इसे संवेदनशील स्थिति में एहतियाती कार्रवाई मान रहे हैं।
तेलंगाना में यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष इसे अपने-अपने नजरिये से जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved