
लखनऊ। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda Saraswati) बुधवार को राजधानी लखनऊ (Lucknow) में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करेंगे। आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन में आयोजित सभा में वे लोगों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर विभिन्न स्थानों से धर्माचार्य और गो-रक्षक मंगलवार को ही लखनऊ पहुंच चुके हैं।
इन दिनों गो-रक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद चर्चा में हैं। वे गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की मांग उठा रहे हैं और इसी को लेकर ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान चला रहे हैं।
यात्रा पर रोक की मांग
शंकराचार्य की ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ को लेकर विवाद भी सामने आया है। एक प्रसिद्ध धर्माचार्य के शिष्य ने सोमवार को जिला अदालत के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर इस यात्रा पर रोक लगाने की मांग की है। अदालत में इस मामले की सुनवाई 13 मार्च को तय की गई है।
दायर याचिका में कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सीतापुर पहुंचने से रोका जाए। जिन बटुकों की ओर से बयान दर्ज कराए गए हैं, वे यात्रा मार्ग में पड़ने वाले पड़ोसी जिले के निवासी बताए जा रहे हैं और उन्होंने यात्रा से भय का हवाला दिया है।
गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 7 मार्च को वाराणसी से ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ की शुरुआत की थी, जिसका समापन 11 मार्च को लखनऊ में होना तय है।
ज्योतिषपीठ विवाद पर भी बयानबाजी
इस बीच ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य चयन को लेकर विवाद भी जारी है। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज के शिष्य और सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वामी रसिक महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
रसिक महाराज का आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अधर्म के मार्ग पर चलते हुए ज्योतिषपीठ पर कब्जा करने की कोशिश की है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन करने वाले काशी के विद्वानों को खुली शास्त्रार्थ की चुनौती भी दी है। साथ ही काशी विद्वत परिषद पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था फर्जी शंकराचार्यों को प्रमाण पत्र जारी करती है।
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