
डेस्क: सऊदी अरब के लिए एक नया खतरा सामने आया है. यह खतरा इराक के ईरान समर्थित शिया आतंकी समूहों से है, इनमें कताइब हिजबुल्लाह और असैब अहल अल-हक का नाम प्रमुख है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन आतंकी संगठनों ने 5 हफ्तों में सऊदी अरब पर लगभग 1000 ड्रोन हमले किए हैं इनमें से करीब आधे हमले इराक की जमीन से किए गए.
इन हमलों में सऊदी के यानबू ऑयल हब की रिफाइनरी और पूर्वी इलाके के तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया. इससे सऊदी के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचा. सिर्फ सऊदी ही नहीं, बल्कि कुवैत, बहरीन और UAE भी इन हमलों से प्रभावित हुए. कुवैत के इकलौते सिविल एयरपोर्ट और बहरीन पर भी ड्रोन हमले हुए. इराक के अंदर कुवैत के कांसुलेट और यूएई के दूतावास को भी निशाना बनाया गया.
ये आतंकी संगठन ईरान की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं. ईरान खुद भी अपने दुश्मनों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है. इसके अलावा लेबनान का हिज्बुल्लाब और इराक के ये समूह मिलकर हमले कर रहे हैं, जिससे ईरान की ताकत और बढ़ जाती है. इराक में इन समूहों की ताकत काफी ज्यादा है. इनकी संख्या दर्जनों में है और इनके पास करीब 2.5 लाख लड़ाके हैं. इनके पास अरबों डॉलर का फंड और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें भी हैं.
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ये समूह आगे भी हमले कर सकते हैं. उसने अपने नागरिकों को इराक में दूतावास और कांसुलेट से दूर रहने को कहा है. बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर कई बार हमले हो चुके हैं और वहां से ज्यादातर स्टाफ हटा लिया गया है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाड़ी देश अब सीधे ईरान पर हमला करने के बजाय इराक में इन आंतकी संगठनों को निशाना बना सकते हैं. सऊदी अरब इराक में चेतावनी के तौर पर छोटे हमले कर सकता है. वहीं कुवैत और बहरीन अमेरिका को अपने इलाके से हमला करने की इजाजत दे सकते हैं. इन हमलों से इराक और खाड़ी देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है. कई बार ये आंतकी संगठन इराक की सरकार से भी ज्यादा ताकतवर नजर आते हैं, जो चिंता की बात है.
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