
नई दिल्ली. यमन (Yemen) के ईरान (Iran) समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) ने लाल सागर में सऊदी अरब (Saudi Arabia) के दो ऑयल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है. हूतियों ने कहा कि दोनों जहाजों ने उनके घोषित नवल ब्लॉकेड का उल्लंघन किया था, इसलिए उन्हें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया.
हूतियों ने जिन दो टैंकरों पर हमले का दावा किया है, उनके नाम एन्सेलिया (ENCELIA) और लैला (LAYLA) बताए गए हैं. इनमें से एन्सेलिया पर हमले की पुष्टि समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी की है.
समुद्री सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि, सऊदी झंडे वाले टैंकर एन्सेलिया ने वीएचएफ के जरिए संकट संदेश भेजकर बताया कि लाल सागर में सऊदी अरब के जिजान बंदरगाह के बाहरी क्षेत्र में उसे एक मिसाइल ने निशाना बनाया, जिससे जहाज में आग लग गई. चालक दल ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी.
सऊदी अरब के अल-शुकैक के पास हुआ टैंकर पर हमला
ब्रिटेन की समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड ने भी पुष्टि की कि एन्सेलिया पर सऊदी अरब के अल-शुकैक से करीब 70 नॉटिकल मील दक्षिण-पश्चिम में एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ. वहीं यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी उसी इलाके में एक टैंकर पर हमले की पुष्टि की. हालांकि, एजेंसी ने किसी के हताहत होने या पर्यावरणीय नुकसान की जानकारी नहीं दी है.
Footage reportedly shows the Saudi oil tanker that was targeted by Yemen.
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— PressTV Extra (@PresstvExtra) July 22, 2026
दूसरे टैंकर लैला पर हमले का दावा फिलहाल स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है. अधिकारियों ने कहा कि चालक दल की स्थिति, नुकसान और अन्य प्रभावों की जांच जारी है. टैंकर पर हमले की वीडियो क्लिप ईरान की प्रेस टीवी ने शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक टैंकर पर भयानक आग लगी है.
हूती ने सऊदी के खिलाफ लगाई है नवल ब्लॉकेड
हूतियों ने कुछ दिन पहले ही लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी का ऐलान किया था. संगठन का दावा है कि चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलकर लौटना पड़ा. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, बुधवार को पांच टैंकरों ने लाल सागर में अपना मार्ग बदल लिया, जिनमें से दो ने स्वेज नहर की ओर रुख कर लिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में ऐसे हमले जारी रहते हैं तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है. इससे पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
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