
लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किया (Expanded the Uttar Pradesh Cabinet) । राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में आयोजित समारोह में छह नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई, जबकि दो राज्यमंत्रियों को प्रमोट किया गया।
सबसे पहले पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भाजपा के साथ आए मनोज पांडेय को मंत्री बनाया गया। इनके अलावा, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत ने भी मंत्री पद की शपथ ली। वहीं, राज्यमंत्री अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर सरकार ने संगठन और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की है। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कृष्णा पासवान ने कहा कि पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में हम लोग और तेजी से कार्य करेंगे।
मंत्रिमंडल विस्तार को भाजपा की सामाजिक इंजीनियरिंग की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नए मंत्रियों में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित चेहरे शामिल किए गए हैं। सपा के प्रभावशाली ब्राह्मण नेता रहे मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने ब्राह्मण वर्ग को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जाट राजनीति के लिहाज से भूपेंद्र चौधरी की ताजपोशी को भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस विस्तार के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों के समीकरणों को मजबूत करने का प्रयास किया है।
इससे पहले योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार 5 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था। उस समय ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। संवैधानिक प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। विस्तार से पहले योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री थे, ऐसे में छह पद रिक्त थे, जिन्हें अब भर दिया गया है।
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